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    संजय दत्त की फिल्म ‘आखिरी सवाल’, गांधी और RSS के हैं अनछुए पहलू

    बॉलीवुड सुपरस्टार संजय दत्त एक बार फिर एक ऐतिहासिक और वैचारिक फिल्म के साथ पर्दे पर वापसी करने जा रहे हैं। उनकी आगामी फिल्म ‘आखिरी सवाल’ (Aakhri Sawaal) इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। यह फिल्म भारतीय इतिहास के दो सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्वों—महात्मा गांधी और आरएसएस (RSS) के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के बीच हुई उस ऐतिहासिक मुलाकात पर आधारित है, जिसके बारे में इतिहास के पन्नों में बहुत कम चर्चा की गई है।

    यहाँ इस फिल्म और उस ऐतिहासिक मुलाकात से जुड़ी मुख्य बातें दी गई हैं:

    वर्धा की वो ऐतिहासिक मुलाकात

    यह फिल्म 1934 की उस घटना को पर्दे पर लाएगी जब महात्मा गांधी वर्धा (महाराष्ट्र) के पास स्थित सेगांव (अब सेवाग्राम) में रह रहे थे। उसी दौरान वर्धा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक शिविर लगा हुआ था।

    • संवाद का विषय: फिल्म उस संवाद को गहराई से दिखाएगी जहाँ गांधी जी और डॉ. हेडगेवार के बीच राष्ट्रवाद, अहिंसा और समाज के संगठन को लेकर चर्चा हुई थी।
    • जिज्ञासा: फिल्म का शीर्षक ‘आखिरी सवाल’ उस अंतिम प्रश्न की ओर इशारा करता है जो शायद उस मुलाकात के दौरान अनुत्तरित रह गया था।

    संजय दत्त की भूमिका और फिल्म का उद्देश्य

    संजय दत्त इस फिल्म में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म का उद्देश्य किसी एक विचारधारा को दूसरे से ऊपर दिखाना नहीं, बल्कि दो अलग-अलग दृष्टिकोणों के बीच के सम्मानजनक संवाद को दुनिया के सामने लाना है।

    1. इतिहास की खोज: निर्देशक का प्रयास है कि दर्शकों को उन तथ्यों से अवगत कराया जाए जो अकादमिक चर्चाओं से दूर रहे हैं।
    2. संजय दत्त का लुक: फिल्म से जुड़े सूत्रों का कहना है कि संजय दत्त इस फिल्म में अपने करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण अवतारों में से एक को निभा रहे हैं।

    क्यों खास है यह फिल्म?

    • वैचारिक मंथन: आज के दौर में जहाँ वैचारिक मतभेद चरम पर हैं, यह फिल्म संवाद की संस्कृति को बढ़ावा देने का काम कर सकती है।
    • सत्य की तलाश: फिल्म का टैगलाइन “सत्य की अपनी आवाज होती है” यह स्पष्ट करता है कि कहानी ऐतिहासिक तथ्यों के करीब रहने की कोशिश करेगी।
    • स्टार कास्ट: संजय दत्त के अलावा फिल्म में थिएटर और सिनेमा के कई दिग्गज कलाकार नजर आएंगे, जो गांधी और हेडगेवार के चरित्रों को जीवंत करेंगे।

    रिलीज और उत्सुकता

    ‘आखिरी सवाल’ की घोषणा के बाद से ही सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस शुरू हो गई है। गांधीवादी और संघ की विचारधारा को मानने वाले, दोनों ही पक्ष इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि फिल्म में इस ऐतिहासिक मुलाकात को किस नजरिए से पेश किया जाएगा।

    संजय दत्त की ‘आखिरी सवाल’ केवल एक मनोरंजन फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास के एक अनछुए पहलू को खंगालने की कोशिश है। यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म उस “आखिरी सवाल” का क्या जवाब देती है जो दशकों से रहस्य बना हुआ है।

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