प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज कर्नाटक के एक दिवसीय दौरे पर रहे। सुबह बेंगलुरु एयरपोर्ट पहुँचने पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद प्रधानमंत्री मांड्या जिले के श्री क्षेत्र आदिचुंचनगिरी पहुँचे, जहाँ उन्होंने श्री गुरु भैरवैक्या मंदिर का उद्घाटन किया और आध्यात्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने जगतगुरु श्री श्री श्री डॉ. बाल गंगाधरनाथ महास्वामीजी को नमन करते हुए समाज और संस्कृति के प्रति उनके योगदान को याद किया।
महास्वामीजी: करुणा और चेतना के प्रतीक
जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि महास्वामीजी करुणा की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने कहा, उनकी करुणा केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं थी, बल्कि सभी जीवों के लिए थी। मोर की रक्षा के लिए उनके द्वारा चलाया गया सामाजिक आंदोलन इसका जीवंत उदाहरण है। मोर न केवल हमारा राष्ट्रीय पक्षी है, बल्कि भगवान सुब्रमण्यम का वाहन भी है। इसलिए उनका कार्य केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना का संरक्षण था।
आध्यात्मिक मार्गदर्शन और समाज सेवा
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि हमारे समाज में समय-समय पर ऐसी दिव्य विभूतियाँ आती रही हैं जिन्होंने केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन ही नहीं दिया, बल्कि लोगों के सुख-दुख को करीब से समझा। उन्होंने कहा, “जगतगुरु डॉ. बाल गंगाधरनाथ महास्वामीजी ने समाज को पीड़ा और कठिनाइयों से बाहर निकालने का रास्ता दिखाया। वे शरीर से भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी उपस्थिति यहाँ स्पष्ट महसूस की जा सकती है।”
एक अविस्मरणीय अनुभव
अपने दौरे के अनुभवों को साझा करते हुए प्रधानमंत्री भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि श्री काल भैरव मंदिर में दर्शन, ज्वाला पीठ में बिताया समय और संतों का सान्निध्य प्राप्त करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने इस पल को शब्दों से परे बताते हुए कहा कि यह आध्यात्मिक अनुभव हमेशा उनके साथ रहेगा।
मंदिर उद्घाटन: श्री गुरु भैरवैक्या के भव्य मंदिर का लोकार्पण।
आदिचुंचनगिरी मठ: ऐतिहासिक ज्वाला पीठ के दर्शन और पूजन।
जनसमूह का दर्शन: मांड्या में उपस्थित बड़ी संख्या में लोगों को संबोधित किया और शुभकामनाएँ दीं।


