More
    HomeHindi NewsDelhi Newsलंदन प्रवास और मस्ती की तस्वीरें, क्या यह है राघव और केजरीवाल...

    लंदन प्रवास और मस्ती की तस्वीरें, क्या यह है राघव और केजरीवाल के बीच दरार की वजह?

    आम आदमी पार्टी (AAP) के ‘पोस्टर बॉय’ माने जाने वाले राघव चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच आई तल्खी रातों-रात पैदा नहीं हुई है। राज्यसभा में उपनेता पद से हटाए जाने और बोलने पर रोक लगाए जाने के पीछे एक लंबी कहानी है, जो अब ‘इनसाइड स्टोरी’ के रूप में सामने आ रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चड्ढा और अरविंद केजरीवाल के बीच दूरियां तब बढ़ीं, जब पार्टी सबसे कठिन दौर से गुजर रही थी।

    मस्ती की तस्वीरें सोशल मीडिया पर हो रही थीं अपलोड

    दूरियों की सबसे बड़ी और पहली वजह अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के दौरान राघव चड्ढा का व्यवहार माना जा रहा है। जब मुख्यमंत्री केजरीवाल जेल में थे और पूरी पार्टी सड़कों पर संघर्ष कर रही थी, तब राघव चड्ढा अपनी पत्नी परिणीति चोपड़ा के साथ लंदन में थे। उस दौरान उनकी छुट्टियों और मस्ती की तस्वीरें सोशल मीडिया पर लगातार अपलोड हो रही थीं, जिसने पार्टी के कट्टर कार्यकर्ताओं और शीर्ष नेतृत्व को नाराज कर दिया। इसे पार्टी के प्रति उनकी ‘गंभीरता की कमी’ के रूप में देखा गया।

    2024 लोकसभा चुनाव में ‘दूरी’

    राघव चड्ढा, जो कभी पंजाब में पार्टी के सर्वेसर्वा और मुख्य रणनीतिकार हुआ करते थे, उन्हें 2024 के लोकसभा चुनावों में पंजाब के चुनावी परिदृश्य से लगभग गायब रखा गया। वे केवल श्री आनंदपुर साहिब सीट पर औपचारिक तौर पर नजर आए। पंजाब की कमान पूरी तरह से मुख्यमंत्री भगवंत मान के हाथों में रही, जिससे संकेत मिले कि हाईकमान अब चड्ढा पर पहले जैसा भरोसा नहीं कर रहा है।


    अहम मुद्दों पर रहस्यमयी खामोशी

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ समय से राघव चड्ढा पार्टी के लिए ‘असेट’ (Asset) के बजाय एक ‘मूक दर्शक’ की भूमिका में आ गए थे।

    1. राष्ट्रीय मुद्दों पर चुप्पी: केंद्र सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलनों और पार्टी की नई नीतियों पर वे अपेक्षाकृत शांत नजर आए।
    2. अनुशासन और सक्रियता: पार्टी के भीतर यह चर्चा आम है कि चड्ढा अब संघर्ष वाली राजनीति के बजाय लग्जरी लाइफस्टाइल और निजी कार्यक्रमों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।

    क्या स्वाति मालीवाल जैसा होगा हश्र?

    दिल्ली भाजपा और राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राघव चड्ढा अब धीरे-धीरे उस रास्ते पर बढ़ रहे हैं, जिस पर कभी स्वाति मालीवाल थीं। पार्टी द्वारा उन्हें बोलने से रोकने का अनुरोध करना इस बात की पुष्टि करता है कि अब चड्ढा और केजरीवाल के रास्ते अलग हो चुके हैं।

    राघव चड्ढा का ‘हाईकमान’ की नजरों से उतरना आम आदमी पार्टी के आंतरिक समीकरणों में बड़े बदलाव का संकेत है। कभी केजरीवाल के ‘हनुमान’ कहे जाने वाले चड्ढा के लिए अब अपनी राजनीतिक जमीन बचाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

    RELATED ARTICLES

    Most Popular

    Recent Comments