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    ‘आप’ का राघव चड्ढा पर पलटवार, “जो डर गया, समझो मर गया”

    आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बयान पर तीखा पलटवार किया है। चड्ढा द्वारा “खामोश करवाया गया हूं” पोस्ट करने के बाद ढांडा ने उन पर बेहद गंभीर और व्यक्तिगत आरोप लगाए हैं। ढांडा ने सीधा हमला करते हुए कहा, “राघव, तुम पिछले कुछ सालों से डर गए हो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बोलने से घबराते हो।” उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि जो डर गया, वह देश के लिए क्या लड़ेगा?

    • समोसे बनाम देश का मुद्दा: ढांडा ने चड्ढा की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि संसद में पार्टी को बहुत कम समय मिलता है। उस समय का उपयोग या तो देश बचाने के संघर्ष के लिए किया जा सकता है या फिर “एयरपोर्ट कैंटीन में समोसे सस्ते करवाने” जैसे सतही मुद्दों के लिए।
    • पार्टी लाइन से दूरी: ढांडा ने आरोप लगाया कि जब गुजरात में ‘आप’ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया, तब चड्ढा खामोश रहे। उन्होंने यह भी दावा किया कि चड्ढा ने चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था और जब पार्टी ने सदन से वॉकआउट किया, तो वे “मोदी जी की हाजिरी लगाने के लिए” बैठे रहे।
    • “जो डर गया, समझो मर गया”: इस विवाद के बीच दिल्ली के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने भी सोशल मीडिया पर “जो डर गया, समझो मर गया” लिखकर ढांडा के रुख का समर्थन किया।

    यह विवाद तब शुरू हुआ जब पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाकर उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त कर दिया और राज्यसभा सचिवालय से चड्ढा को बोलने का समय न देने का अनुरोध किया।

    आगे क्या?

    राघव चड्ढा ने अभी तक इस पलटवार पर कोई नई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पार्टी के “डरपोक” वाले तंज ने इस विवाद को और निजी बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या चड्ढा पार्टी में बने रहते हैं या स्वाति मालीवाल की तरह अपना अलग रास्ता चुनते हैं।

    ‘आप’ के इस पलटवार ने साफ कर दिया है कि पार्टी अब चड्ढा के साथ ‘नरम’ रुख अपनाने के मूड में नहीं है और यह लड़ाई अब आर-पार की स्थिति में पहुंच गई है।

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