पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच के भीषण युद्ध की सबसे बड़ी मानवीय कीमत भारत चुका रहा है। 2 अप्रैल 2026 को ब्रिटेन द्वारा आयोजित 60 देशों की एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक (Summit of Nations) में भारत ने बेहद कड़ा और भावुक पक्ष रखा। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाया कि इस युद्ध में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में जान गंवाने वाले केवल भारतीय नाविक (Mariners) ही हैं।
8 भारतीयों की मौत और भारत का कड़ा रुख
बैठक के दौरान भारत ने आधिकारिक तौर पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अब तक इस संघर्ष में 8 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है।
- एकमात्र देश: भारत ने जोर देकर कहा कि वह दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में अपने नागरिकों को खोया है।
- ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा: विदेश सचिव ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना न केवल मानवीय क्षति है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) के लिए भी बड़ा खतरा है, क्योंकि भारत अपनी एलपीजी (LPG) और एलएनजी (LNG) आपूर्ति के लिए इसी मार्ग पर निर्भर है।
60 देशों की बैठक और ‘होर्मुज’ का संकट
ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में फ्रांस, जर्मनी, कनाडा और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सहित 60 से अधिक देशों ने भाग लिया।
- स्वतंत्र आवाजाही की मांग: बैठक में शामिल सभी देशों ने सर्वसम्मति से ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किए जाने की निंदा की और इसे “वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने” जैसा कृत्य बताया।
- अमेरिका की अनुपस्थिति: दिलचस्प बात यह रही कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाला अमेरिका इस बैठक में शामिल नहीं हुआ। ट्रंप ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि इस समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखना केवल वाशिंगटन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि उन देशों को भी आगे आना चाहिए जिनका व्यापार यहां से होता है।
भारत की कूटनीतिक पहल
भारत ने वैश्विक मंच पर दोहराया कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।
- शांति की अपील: भारत ने सभी पक्षों से तनाव कम करने और डिप्लोमेसी (Diplomacy) के रास्ते पर लौटने का आग्रह किया है।
- जहाजों की सुरक्षा: विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, भारत लगातार ईरान और अन्य क्षेत्रीय देशों के संपर्क में है ताकि वहां फंसे हुए भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सके। हाल के दिनों में भारत के 6 जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज पार करने में सफल रहे हैं।
निष्कर्ष: होर्मुज में भारतीयों की जान जाना भारत के लिए एक बड़ा राष्ट्रीय दर्द है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक शांति के नाम पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।


