प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राज्यसभा में पश्चिम एशिया (West Asia) संकट पर देश को संबोधित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान-इजरायल युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा प्रतिकूल प्रभाव लंबे समय तक बना रह सकता है। उन्होंने इस स्थिति की तुलना कोविड-19 महामारी के दौर से करते हुए देश को एकजुट और तैयार रहने का आह्वान किया।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत पर असर
पीएम मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसने पूरी दुनिया की सप्लाई चेन को बाधित कर दिया है।
- लंबा खिंचेगा असर: उन्होंने स्पष्ट किया कि युद्ध के प्रभाव ‘लॉन्ग टर्म’ (दीर्घकालिक) होंगे, जिससे ऊर्जा की कीमतों और व्यापारिक मार्गों पर दबाव बना रहेगा।
- कच्चा तेल और एलपीजी: भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का 60% आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से आता है। इस मार्ग पर तनाव से गैस और तेल की आपूर्ति चुनौतीपूर्ण हो गई है।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए ‘अभेद्य’ तैयारी
संकट के बावजूद, पीएम ने देश को आश्वस्त किया कि सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं:
- पेट्रोलियम रिजर्व: भारत के पास वर्तमान में 53 लाख मीट्रिक टन का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार है, जिसे बढ़ाकर 65 लाख मीट्रिक टन करने पर काम चल रहा है।
- आयात का विविधीकरण: पिछले 11 वर्षों में भारत ने तेल आयात करने वाले देशों की संख्या 27 से बढ़ाकर 41 कर दी है, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हुई है।
- घरेलू उत्पादन: सरकार घरेलू स्तर पर एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और एथेनॉल ब्लेंडिंग (जिससे सालाना 4.5 करोड़ बैरल तेल की बचत हो रही है) पर जोर दे रही है।
भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा
खाड़ी देशों में रहने वाले लगभग 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा को पीएम ने अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन सुरक्षा’ के तहत अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीयों को संघर्ष क्षेत्रों से सुरक्षित निकाला जा चुका है। उन्होंने राज्यसभा से अपील की कि पूरा सदन शांति और संवाद के लिए एक स्वर में दुनिया को संदेश दे।
जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त रुख
प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे युद्ध की आड़ में होने वाली जमाखोरी और आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी पर कड़ी नजर रखें। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य को मिलकर इस आर्थिक चुनौती का सामना करना होगा।
प्रधानमंत्री ने “संवाद और कूटनीति” को ही एकमात्र समाधान बताया और कहा कि भारत किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।


