देश के कई हिस्सों में मार्च के महीने में मौसम ने ऐसी करवट ली है कि मानसून जैसे हालात पैदा हो गए हैं। शनिवार, 21 मार्च 2026 को आई रिपोर्टों के अनुसार, उत्तर और मध्य भारत के बड़े हिस्से में तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और भारी ओलावृष्टि ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।
इस बेमौसम बदलाव ने जहाँ एक ओर लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी है, वहीं दूसरी ओर कटाई के लिए तैयार रबी की फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया है।
प्रमुख मौसमी गतिविधियाँ
पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण मौसम में यह बदलाव देखा जा रहा है:
- उत्तर भारत: पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। आगरा और मथुरा जैसे क्षेत्रों में सुबह घना कोहरा छाया रहा, जिससे दृश्यता शून्य के करीब पहुँच गई।
- मध्य भारत: मध्य प्रदेश के लगभग 40 जिलों में बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की गई। बैतूल और धार जैसे इलाकों में बड़े आकार के ओले गिरे।
- पहाड़ी क्षेत्र: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बर्फबारी के कारण लगभग 10 हाईवे बंद करने पड़े।
किसानों पर दोहरी मार
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह समय रबी की फसलों (विशेषकर गेहूँ और सरसों) की कटाई का है।
- फसलों का बिछना: तेज हवाओं के कारण गेहूँ की खड़ी फसल खेतों में बिछ गई है, जिससे दाना काला पड़ने और पैदावार घटने का खतरा है।
- गुणवत्ता में गिरावट: नमी और ओलावृष्टि से सरसों, चना और मसूर की फलियां चटक गई हैं।
- बागवानी को नुकसान: आम, अंगूर और तरबूज की फसलों को भी ओलों ने बुरी तरह प्रभावित किया है।
सरकार का एक्शन
हालात को देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को राज्य सरकारों के साथ मिलकर नुकसान का तुरंत आकलन (Survey) करने के निर्देश दिए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सभी जिलाधिकारियों को फील्ड रिपोर्ट देने और राहत कार्य तेज करने को कहा है।
अगले 24 से 48 घंटों तक उत्तर और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश जारी रह सकती है। किसानों को कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी गई है।


