संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान के दोहरे मापदंडों और ‘इस्लामोफोबिया’ के नाम पर फैलाए जा रहे झूठे प्रचार की धज्जियां उड़ाई हैं। 17 मार्च 2026 को ‘इंटरनेशनल डे टू कॉम्बैट इस्लामोफोबिया’ के अवसर पर आयोजित चर्चा में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वथनेनी हरीश ने पाकिस्तान को जमकर लताड़ा।
भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान अपने पड़ोसी देशों के खिलाफ इस्लामोफोबिया की मनगढ़ंत कहानियाँ गढ़ने में माहिर है, जबकि उसका अपना रिकॉर्ड अल्पसंख्यकों के अधिकारों के हनन से भरा हुआ है।
भारत के कड़े प्रहार: मुख्य बिंदु
संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान के पाखंड को उजागर करने के लिए निम्नलिखित प्रमुख बातें कहीं:
- धार्मिक पहचान का राजनीतिकरण: भारत ने चिंता जताई कि कुछ देश और गैर-राज्य तत्व (Non-state actors) अपने संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों को साधने के लिए धार्मिक पहचान को हथियार बना रहे हैं।
- अल्पसंख्यकों का दमन: भारत ने बिना नाम लिए पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए पूछा कि वह अपने देश में अहमदिया समुदाय के क्रूर दमन और बेसहारा अफगान शरणार्थियों को जबरन निकालने पर चुप क्यों है?
- रमजान में सैन्य हमले: भारत ने पाकिस्तान द्वारा पवित्र रमजान के महीने में अफगानिस्तान पर किए गए हवाई हमलों (ऑपरेशन गजब लिलहक) का जिक्र किया, जिसमें एक अस्पताल को निशाना बनाया गया और भारी संख्या में नागरिक मारे गए।
- OIC का दुरुपयोग: भारत ने कहा कि पाकिस्तान लगातार इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) का इस्तेमाल भारत के खिलाफ झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाने के लिए करता रहा है।
‘फोबिया’ बनाम ‘बहुसंस्कृतिवाद’
भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत में 20 करोड़ से अधिक मुस्लिम आबादी है, जो दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी में से एक है।
“भारत में मुसलमान, जिनमें जम्मू-कश्मीर के लोग भी शामिल हैं, अपने प्रतिनिधियों को स्वयं चुनते हैं। यहां जो एकमात्र ‘फोबिया’ दिखाई देता है, वह भारत के उस बहुसांस्कृतिक और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के खिलाफ है, जिसका आनंद यहां के सभी समुदाय लेते हैं।” — पर्वथनेनी हरीश, UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि
निष्कर्ष और संदेश
भारत ने संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि केवल एक धर्म के प्रति नफरत पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय ‘रिलिजियोफोबिया’ (सभी धर्मों के प्रति नफरत) के व्यापक मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए। भारत ने दोहराया कि वह हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों की जन्मस्थली है और ‘सर्वधर्म समभाव’ के सिद्धांत में विश्वास रखता है।


