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सिलेंडर घर नहीं पहुंचा तो क्या करें, जानें कहाँ दर्ज करें शिकायत

एलपीजी (LPG) उपभोक्ताओं के लिए अक्सर एक बड़ी समस्या सामने आती है—मोबाइल पर “सिलेंडर डिलीवर हो गया है” का मैसेज तो आ जाता है, लेकिन हकीकत में सिलेंडर घर तक नहीं पहुंचता। यह न केवल असुविधाजनक है, बल्कि सब्सिडी और सुरक्षा के लिहाज से भी चिंताजनक है।

अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो परेशान होने के बजाय आपको तुरंत कदम उठाने चाहिए। यहाँ जानें कि ऐसी स्थिति में आपको क्या करना है और शिकायत कहाँ दर्ज करनी है।

डिलीवरी मैसेज आने पर क्या करें?

जैसे ही आपको डिलीवरी का पुष्टिकरण मैसेज मिले और सिलेंडर न मिला हो, तो सबसे पहले इन स्टेप्स को फॉलो करें:

  1. डिलीवरी मैन से संपर्क: अपनी पिछली रसीद या गैस एजेंसी से डिलीवरी मैन का नंबर लेकर उससे बात करें। कई बार तकनीकी खराबी या रूट की वजह से देरी हो सकती है।
  2. गैस एजेंसी (डिस्ट्रीब्यूटर) को सूचित करें: अगर डिलीवरी मैन संतोषजनक जवाब न दे, तो सीधे अपनी गैस एजेंसी के ऑफिस जाएं या उन्हें फोन करें। एजेंसी के पास डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) के बिना डिलीवरी मार्क करने का अधिकार नहीं होता।

यहाँ करें आधिकारिक शिकायत

अगर एजेंसी आपकी बात नहीं सुनती, तो आप इन टोल-फ्री नंबरों और पोर्टल्स का उपयोग कर सकते हैं:

  • कॉमन हेल्पलाइन नंबर: देश की तीनों बड़ी कंपनियां (Indane, HP, Bharat Gas) एक कॉमन नंबर 1906 पर शिकायतें स्वीकार करती हैं।
  • इंडेन (Indane): उपभोक्ता 1800-233-3555 पर कॉल कर सकते हैं।
  • भारत गैस और एचपी: आप उनकी आधिकारिक वेबसाइटों या मोबाइल ऐप के माध्यम से ‘फीडबैक/शिकायत’ सेक्शन में अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं।
एजेंसीकस्टमर केयर नंबर
Indane1800-233-3555
HP Gas1800-233-3555
Bharat Gas1800-22-4344

जरूरी नियम जो आपको पता होने चाहिए

  • DAC कोड: अब अधिकांश शहरों में डिलीवरी के समय आपके रजिस्टर्ड मोबाइल पर एक OTP आता है। बिना इस कोड के डिलीवरी पूरी नहीं मानी जाती। अपना OTP कभी भी सिलेंडर मिलने से पहले साझा न करें।
  • वजन की जांच: नियम के अनुसार, डिलीवरी मैन को आपके सामने सिलेंडर का वजन करना चाहिए और सील की जांच करानी चाहिए।
  • कैश मेमो: हमेशा गैस एजेंसी द्वारा जारी डिजिटल या फिजिकल कैश मेमो ही लें। अधिक पैसे मांगे जाने पर आप इसकी शिकायत भी कर सकते हैं।

बिना सिलेंडर प्राप्त किए मैसेज आना ‘फेक डिलीवरी’ की श्रेणी में आता है, जिसका इस्तेमाल कई बार सब्सिडी की हेराफेरी के लिए किया जा सकता है।

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