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    देशभर में पश्चिमी विक्षोभ का असर, भारी हिमपात और मध्यम बारिश की चेतावनी

    दिल्ली-NCR में रविवार, 15 मार्च 2026 की सुबह मौसम ने करवट ली और भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों को बड़ी राहत मिली। राजधानी के कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलीं, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इसके लिए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) को जिम्मेदार बताया है।

    दिल्ली-NCR में मौसम का हाल

    रविवार सुबह दिल्ली के पालम, रोहिणी, चाणक्यपुरी, जनपथ और पंडित पंत मार्ग जैसे इलाकों में झमाझम बारिश हुई। बारिश के साथ 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं।

    • तापमान में गिरावट: पिछले कुछ दिनों से दिल्ली का अधिकतम तापमान 36°C के पास पहुंच गया था, लेकिन इस बारिश के बाद इसमें 4 से 7 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आने का अनुमान है।
    • अलर्ट जारी: IMD ने दिल्ली के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ और नोएडा, गुरुग्राम जैसे पड़ोसी शहरों के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है।

    देशभर में पश्चिमी विक्षोभ का असर

    यह मौसमी बदलाव केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक मौसम प्रभावित हो रहा है:

    • पहाड़ी क्षेत्र: जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में भारी हिमपात (Snowfall) और मध्यम बारिश की चेतावनी दी गई है। कुल्लू और मनाली जैसे पर्यटन स्थलों पर भी मौसम का असर दिख रहा है।
    • मैदानी राज्य: पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में 19 मार्च तक रुक-रुक कर बारिश और ओलावृष्टि (Hailstorm) की संभावना है।
    • पूर्वी और मध्य भारत: झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में भी अगले 3-4 दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में धूल भरी आंधी चलने का अनुमान है।
    • दक्षिण भारत: केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में प्री-मानसून बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

    कृषि और आम जनजीवन पर प्रभाव

    जहाँ एक ओर इस बारिश ने गर्मी से राहत दी है, वहीं किसानों के लिए ओलावृष्टि चिंता का विषय बनी हुई है। तैयार खड़ी फसलों को तेज हवाओं और ओलों से नुकसान पहुंचने की आशंका है। मौसम विभाग ने यात्रियों को भी पहाड़ी रास्तों पर फिसलन और कम दृश्यता के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस मौसमी बदलाव के कारण उत्तर भारत में अप्रैल के मध्य तक भीषण लू (Heatwave) चलने की संभावना कम हो गई है।

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