उत्तर प्रदेश में मौसम का एक बेहद अजीब और चौंकाने वाला रूप सामने आया है। मार्च के महीने में, जब सूरज की तपिश बढ़ने लगती है, राज्य के कई जिलों में दिसंबर-जनवरी जैसी घनी धुंध और कोहरा देखा जा रहा है। तापमान में तेजी से हो रही वृद्धि के बीच इस तरह का बदलाव न केवल आम जनता, बल्कि मौसम वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों को भी हैरान कर रहा है।
असामान्य धुंध का कहर
- दिसंबर जैसा अहसास: कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज और मेरठ समेत कई जिलों में मंगलवार और बुधवार सुबह घना कोहरा छाया रहा। कई जगहों पर दृश्यता (Visibility) घटकर 30 से 50 मीटर तक रह गई, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ।
- बढ़ता तापमान: एक तरफ जहां दोपहर में बांदा और झांसी जैसे जिलों में पारा 38°C के करीब पहुंच रहा है, वहीं सुबह की ये धुंध लोगों को ठिठुरन का अहसास करा रही है।
विशेषज्ञ क्यों हैं हैरान?
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च में इस तरह का घना कोहरा “रेडिएशन फॉग” और “हवा के पैटर्न में बदलाव” का परिणाम है:
- नमी और धूल का मेल: बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी भरी पुरवाई हवाओं (Easterly Winds) और स्थानीय स्तर पर मौजूद धूल के कणों के आपस में मिलने से यह स्थिति बनी है।
- तापमान का अंतर: दिन में अत्यधिक गर्मी और रात में अचानक तापमान गिरने से हवा में मौजूद नमी कंडेंस (condense) होकर कोहरे का रूप ले लेती है।
- क्लाइमेट चेंज: विशेषज्ञों का मानना है कि यह ग्लोबल वार्मिंग और तेजी से बदलते जलवायु चक्र का संकेत है। इससे पहले साल 2008 में मार्च के दौरान ऐसी धुंध देखी गई थी।
स्वास्थ्य और कृषि पर असर
डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि तापमान में इस भारी उतार-चढ़ाव (सुबह कोहरा, दोपहर में तेज धूप) के कारण वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। वहीं, कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यह स्थिति ज्यादा दिन बनी रही, तो पकने की कगार पर खड़ी गेहूं की फसल को नुकसान हो सकता है।


