पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट के मैदान पर होने वाले भारी दबाव और भारतीय प्रशंसकों के जुनून को लेकर बड़ा बयान दिया है। अफरीदी ने स्वीकार किया कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों को मैदान पर भारतीय टीम से ज्यादा भारतीय प्रशंसकों के “शोर और दबाव” से डर लगता था।
2011 वर्ल्ड कप का वो खौफनाक मंजर
शाहिद अफरीदी ने मोहाली में खेले गए 2011 वनडे वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल को याद करते हुए कहा कि उस दिन का माहौल आज भी उनके जहन में ताजा है। अफरीदी ने बताया, “जब हम मोहाली के मैदान पर उतरे, तो पूरे स्टेडियम में सिर्फ ‘इंडिया-इंडिया’ की गूंज थी। वह शोर इतना जबरदस्त था कि मैदान पर एक-दूसरे की बात सुनना भी मुश्किल था। मुझे आज भी वह मंजर याद है, जिसने हमारी टीम के मनोबल पर गहरा असर डाला था।”
उनका मानना है कि भारतीय फैंस का यह जबरदस्त समर्थन पाकिस्तानी खिलाड़ियों के लिए किसी भी घातक गेंदबाज या बल्लेबाज से बड़ा खतरा साबित होता है।
खिलाड़ियों से ज्यादा प्रशंसकों का डर
अफरीदी ने एक पॉडकास्ट में बात करते हुए स्पष्ट किया कि पाकिस्तानी टीम तकनीकी रूप से भारतीय खिलाड़ियों का सामना करने के लिए तैयार रहती है, लेकिन भारतीय क्राउड के मानसिक दबाव को झेलना सबसे बड़ी चुनौती होती है।
- मेंटल गेम: अफरीदी के अनुसार, जब हजारों लोग एक साथ चिल्लाते हैं, तो विरोधी टीम के पैर कांपने लगते हैं।
- घरेलू फायदा: उन्होंने स्वीकार किया कि भारत में खेलना किसी भी विदेशी टीम के लिए दुनिया का सबसे कठिन काम है क्योंकि प्रशंसक 12वें खिलाड़ी की भूमिका निभाते हैं।
वर्तमान परिदृश्य और कड़वाहट
अफरीदी का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में भारत ने एक और T20 वर्ल्ड कप जीता है और पाकिस्तान क्रिकेट अपने सबसे निचले स्तर से गुजर रहा है। अफरीदी अक्सर भारत-पाक क्रिकेट संबंधों पर मुखर रहते हैं। हालांकि उन्होंने भारतीय प्रशंसकों के प्यार की भी तारीफ की, लेकिन उन्होंने यह भी माना कि हार की स्थिति में वही प्रशंसक दबाव का पहाड़ बन जाते हैं।
भारत-पाक मैचों का भविष्य
अफरीदी ने अंत में उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सीरीज (Bilateral Series) फिर से शुरू होनी चाहिए, ताकि नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को उस दबाव को झेलना और उससे सीखना आ सके। उन्होंने कहा कि बिना भारत के साथ खेले कोई भी पाकिस्तानी खिलाड़ी “असली चैंपियन” नहीं बन सकता।


