ईरान और इस्राइल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध अब बेहद भयावह मोड़ पर पहुँच चुका है। संयुक्त राष्ट्र (UN) में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने अमेरिका और इस्राइल पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे “युद्ध अपराध” और “मानवता के खिलाफ अपराध” करार दिया है।
ईरान के गंभीर आरोप और 1300 से अधिक मौतें
ईरान ने दावा किया है कि इस्राइली और अमेरिकी हवाई हमलों में अब तक कम से कम 1,332 ईरानी नागरिकों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। इरावानी ने न्यूयॉर्क में संवाददाताओं से कहा कि हमलावर सेनाएं किसी भी ‘रेड लाइन’ का सम्मान नहीं कर रही हैं और जानबूझकर घनी आबादी वाले नागरिक इलाकों, स्कूलों और अस्पतालों को निशाना बना रही हैं।
- स्कूलों पर हमला: ईरानी रेड क्रेसेंट सोसाइटी के अनुसार, अब तक 20 से अधिक स्कूलों को नुकसान पहुँचा है। दक्षिण ईरान के मीनाब शहर में एक बालिका विद्यालय पर हुए हमले में 150 से अधिक छात्राओं और शिक्षकों की मौत की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश पैदा कर दिया है।
- नागरिक बुनियादी ढांचा: ईरान का आरोप है कि हमले केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मनोरंजन केंद्रों, खेल सुविधाओं और चिकित्सा केंद्रों को भी “आतंक फैलाने” के उद्देश्य से निशाना बनाया जा रहा है।
अमेरिका-इस्राइल का रुख
दूसरी ओर, अमेरिका और इस्राइल इन हमलों को “आत्मरक्षा” और “शासन परिवर्तन” (Regime Change) के उद्देश्य से की गई कार्रवाई बता रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि ईरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम फिर से शुरू कर दिया है, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है। उन्होंने ईरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की मांग भी की है।
UN और अंतरराष्ट्रीय चिंता
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका-इस्राइल के हवाई हमले और ईरान के जवाबी मिसाइल हमले अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन हैं। इस युद्ध के कारण पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता फैल गई है और ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आया है।


