ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद, उनके 56 वर्षीय बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) चुना गया है। हालांकि ईरान में उत्तराधिकार को लेकर कई नाम चर्चा में थे, लेकिन ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने अंततः मोजतबा के नाम पर मुहर लगा दी।
मोजतबा खामेनेई के बारे में मुख्य जानकारी नीचे दी गई है:
1. कौन हैं मोजतबा खामेनेई?
- जन्म और शिक्षा: मोजतबा का जन्म 1969 में मशहद में हुआ था। उन्होंने अपनी धार्मिक शिक्षा क़ोम (Qom) के प्रतिष्ठित मदरसों से प्राप्त की है।
- सैन्य पृष्ठभूमि: उन्होंने 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान ईरानी सशस्त्र बलों (IRGC) में सेवा दी थी।
- शक्तिशाली प्रभाव: दशकों तक मोजतबा ने कभी कोई आधिकारिक सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन उन्हें अपने पिता के कार्यालय (Office of the Supreme Leader) का ‘गेटकीपर’ माना जाता था। वे पर्दे के पीछे से देश की खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा तंत्र (विशेषकर IRGC) पर मजबूत पकड़ रखते थे।
2. अरबों की संपत्ति और साम्राज्य
मोजतबा खामेनेई को दुनिया के सबसे अमीर धार्मिक नेताओं में गिना जाता है। उनकी संपत्ति के बारे में निम्नलिखित दावे किए जाते हैं:
- विशाल नेट वर्थ: अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स और ब्लूमबर्ग की जांच के अनुसार, मोजतबा के पास अरबों डॉलर की संपत्ति है। हालांकि उनकी सटीक नेट वर्थ गुप्त है, लेकिन अनुमानित तौर पर उनके परिवार का नियंत्रण 95 अरब डॉलर से अधिक के वित्तीय साम्राज्य (विशेष रूप से ‘सेताद’ संगठन के माध्यम से) पर है।
- विदेशी संपत्तियां: रिपोर्टों के अनुसार, उनके पास लंदन, दुबई, सीरिया और वेनेजुएला जैसे देशों में भारी निवेश और संपत्तियां हैं। इनमें लंदन की ‘बिलियनेयर्स रो’ में आलीशान घर और यूरोप के कई देशों में लग्जरी होटल शामिल बताए जाते हैं।
- प्रतिबंध: उनकी इन्हीं संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों और सत्ता में प्रभाव के कारण 2019 में अमेरिका ने उन पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे।
3. उत्तराधिकार और चुनौतियां
ईरान के इतिहास में यह पहली बार है जब सर्वोच्च नेता का पद पिता से पुत्र को मिला है। इसे लेकर ईरान के भीतर और बाहर काफी बहस है:
- वंशानुगत राजतंत्र का विरोध: आलोचकों का तर्क है कि यह 1979 की क्रांति के सिद्धांतों के खिलाफ है, क्योंकि क्रांति राजशाही (शाह का शासन) को खत्म करने के लिए हुई थी।
- IRGC का समर्थन: माना जाता है कि मोजतबा की नियुक्ति में ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, क्योंकि उनके सुरक्षा बलों के साथ बहुत करीबी रिश्ते हैं।
- धार्मिक योग्यता: मोजतबा एक मध्यम स्तर के धर्मगुरु हैं, इसलिए उनके ‘अयातुल्ला’ के दर्जे को लेकर वरिष्ठ मौलवियों के बीच असंतोष की खबरें भी आती रही हैं।


