भारत और अमेरिका के बीच हालिया व्यापार समझौता (Trade Deal) वैश्विक राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। डोनल्ड ट्रंप जैसे “कठोर सौदागर” माने जाने वाले नेता के सामने जिस तरह भारत ने अपनी शर्तों पर बात मनवाई है, वह कूटनीतिक हलकों में एक मिसाल बन गई है। फरवरी 2026 की इस डील ने स्पष्ट कर दिया है कि अपनी बात मनवाने के लिए ‘खुशामद’ नहीं, बल्कि ‘रणनीतिक धैर्य’ और ‘विकल्पों की विविधता’ की आवश्यकता होती है। भारत ने दिखा दिया है कि कूटनीति में ‘जी-हुजुरी’ के बजाय ‘बराबरी’ का भाव ही सबसे सफल परिणाम देता है।
बातचीत का नया भारतीय मॉडल
भारत ने ट्रंप प्रशासन के साथ सौदेबाजी में जो रुख अपनाया, उसके मुख्य स्तंभ निम्नलिखित रहे हैं:
- रणनीतिक धैर्य (Resilient Patience): जब अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर 50% तक कर दिया था, तब भारत ने न तो घुटने टेके और न ही कोई जल्दबाजी में प्रतिक्रिया दी। भारत ने शांत रहकर बातचीत के दरवाजे खुले रखे।
- विकल्पों का विस्तार: अमेरिका के साथ तनाव के बीच भारत ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किया। इससे वाशिंगटन को यह संदेश गया कि भारत केवल अमेरिकी बाजार पर निर्भर नहीं है।
- दबाव मुक्त कूटनीति: भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ से समझौता नहीं करेगा। रूसी तेल की खरीद और चीन के साथ व्यापारिक संतुलन को भारत ने मोलभाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया।
डील के प्रमुख परिणाम
2 फरवरी 2026 को घोषित इस अंतरिम समझौते के तहत कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं:
| क्षेत्र | पहले की स्थिति | नई स्थिति (2026 डील) |
| अमेरिकी टैरिफ | 50% (दंडात्मक शुल्क सहित) | घटाकर 18% किया गया |
| रूसी तेल | भारत पर खरीद बंद करने का दबाव | भारत धीरे-धीरे अमेरिकी और वेनेजुएला के तेल की ओर शिफ्ट होगा |
| बाजार पहुंच | सीमित और उच्च शुल्क | अमेरिकी कृषि उत्पादों और तकनीक के लिए बेहतर पहुंच |
| निवेश | अनिश्चितता | $500 बिलियन के भविष्य के व्यापार का लक्ष्य |
दुनिया के लिए सबक
इस डील ने साबित किया है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में “लेन-देन” (Transactional) नीति का मुकाबला केवल मजबूती से ही किया जा सकता है।
- झुकने के बजाय डटे रहना: ट्रंप के टैरिफ वॉर के सामने भारत का न झुकना अन्य देशों (जैसे वियतनाम या बांग्लादेश) के लिए एक केस स्टडी है।
- हितों का संतुलन: पीएम मोदी ने ‘मेक इन इंडिया’ और किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए उन क्षेत्रों में रियायतें दीं जहां भारत को तकनीक या ऊर्जा की आवश्यकता थी।
- ट्रंप का दौरा और विश्वास: इस फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के बाद अब ट्रंप के भारत दौरे का रास्ता साफ हो गया है। यह दिखाता है कि जब दोनों पक्ष एक-दूसरे की मजबूती का सम्मान करते हैं, तभी स्थायी संबंध बनते हैं।


