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    अमेरिका से 22 लाख टन की डील, भारत का नया LPG पार्टनर बनकर उभरा

    पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में उपजे सुरक्षा संकट के बीच भारत की ऊर्जा रणनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव आया है। देश के करोड़ों घरों की रसोई को सुचारू रूप से चलाने के लिए अमेरिका भारत का सबसे बड़ा और नया एलपीजी (LPG) पार्टनर बनकर उभरा है। संकट के इस दौर में अमेरिकी बंदरगाहों से एलपीजी के विशाल टैंकर धड़ाधड़ भारतीय तटों पर पहुंच रहे हैं।

    22 लाख टन डील की ‘इनसाइड स्टोरी’

    भारत अपनी कुल एलपीजी खपत का लगभग 60% हिस्सा आयात (इंपोर्ट) के जरिए पूरा करता है। पिछले साल तक भारतीय बाजारों में अमेरिका कोई बहुत बड़ा प्लेयर नहीं था, लेकिन भारत की सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, और HPCL) ने दूरदर्शिता दिखाते हुए एक बड़ा दांव खेला था।

    • एक साल का मेगा कॉन्ट्रैक्ट: भारतीय रिफाइनरियों ने अमेरिकी सप्लायर्स के साथ सालाना 22 लाख मीट्रिक टन (2.2 Million Metric Tonnes) एलपीजी आयात करने के लिए एक साल का टर्म कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था।
    • रणनीति में आया ट्विस्ट: शुरुआत में तय हुआ था कि भारत अपनी कुल जरूरत का महज 10% हिस्सा ही अमेरिका से मंगाएगा और यह सप्लाई जनवरी 2026 से शुरू भी हो गई थी। लेकिन फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-ईरान युद्ध ने पूरी तस्वीर बदल दी।

    कैसे बदला एलपीजी आयात का गणित?

    पारंपरिक रूप से भारत अपनी 90% एलपीजी खाड़ी देशों (यूएई, सऊदी अरब, कतर और कुवैत) से मंगाता था। हॉर्मुज स्ट्रेट में बारूदी सुरंगों और सुरक्षा खतरों के कारण खाड़ी देशों से होने वाली सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो गई। इसके बाद भारत ने अपनी रणनीतिक निर्भरता को डायवर्सिफाई (विविध) किया।

    सप्लायर देशपहले हिस्सेदारीमई 2026 में हिस्सेदारीस्थिति
    अमेरिका (USA)~10% (अनुमानित)55%अब भारत का नंबर-1 एलपीजी सप्लायर
    ईरान (Iran)0% (2019 से बंद)12%मुश्किल वक्त में दूसरा सबसे बड़ा संकटमोचक
    खाड़ी देश (यूएई, कतर आदि)~90%भारी गिरावटसमुद्री मार्ग बाधित होने से सप्लाई सीमित

    मई 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका से भारत को होने वाला एलपीजी निर्यात 73% बढ़कर 6.66 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया, जिसने खाड़ी देशों से आई कमी की पूरी भरपाई कर दी।

    भारत के लिए बड़ी चुनौतियां और समाधान

    लागत में भारी बढ़ोतरी: अमेरिका से भारत तक एलपीजी लाने का समुद्री सफर खाड़ी देशों के 7-8 दिनों के मुकाबले 45 दिनों का लंबा रास्ता लेता है। इसके कारण अमेरिका से माल ढोने का भाड़ा (Freight Cost) सऊदी अरब के मुकाबले लगभग चार गुना ज्यादा बैठ रहा है, जिससे घरेलू स्तर पर एलपीजी की कीमतों और सब्सिडी पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

    इस संकट और बढ़ी हुई लागत से निपटने के लिए भारत सरकार ने दोतरफा रणनीति पर काम किया है:

    1. घरेलू उत्पादन में रिकॉर्ड तेजी: भारत ने अपने घरेलू एलपीजी उत्पादन को लगभग 40% बढ़ा दिया है। पहले जहां देश में रोजाना 35,000 मीट्रिक टन गैस का उत्पादन होता था, वह अब बढ़कर 52,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन तक पहुंच चुका है।
    2. नए देशों से साझेदारी: भारत ने केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि स्पॉट मार्केट से अतिरिक्त कार्गो खरीदते हुए नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया, अर्जेंटीना और रूस जैसे देशों से भी गैस की खेप मंगवानी शुरू कर दी है। इसके अलावा, कच्चे तेल के मोर्चे पर रूस अब भी 19.5 लाख बैरल प्रतिदिन के साथ भारत का सबसे बड़ा मददगार बना हुआ है।
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