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    विवादों में घिरी ‘यादव जी की लव स्टोरी’, UP में सड़क पर उतरा यादव समाज

    हाल के दिनों में सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ (Yadav Ji Ki Love Story) को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है। फिल्म के शीर्षक और उसके कंटेंट को लेकर कुछ समुदायों और राजनीतिक संगठनों ने आपत्ति जताई है। उप्र में यादव समाज सड़क पर उतर आया है। 

    1. फिल्म की कहानी (Plot)

    यह फिल्म उत्तर प्रदेश और बिहार की पृष्ठभूमि पर आधारित एक रोमांटिक-ड्रामा है। फिल्म की कहानी एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार के युवक (यादव जी) और एक मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की के बीच के प्रेम संबंधों के इर्द-गिर्द घूमती है।

    • विवाद की जड़: फिल्म में एक विशेष समुदाय के चित्रण और ‘यादव’ सरनेम के इस्तेमाल को लेकर आरोप लग रहे हैं कि यह एक समुदाय की छवि को धूमिल करने की कोशिश है।
    • कहानी का मोड़: मेकर्स का दावा है कि यह एक काल्पनिक कहानी है जो जातिगत बंधनों को तोड़कर प्रेम की जीत को दर्शाती है, लेकिन विरोधियों का कहना है कि इसमें कुछ संवाद और दृश्य अपमानजनक हैं।
    • कहानी के केंद्र में सिंपल यादव (प्रगति तिवारी) है, जो एक दोराहे पर खड़ी है। वह वसीम अख्तर (विशाल मोहन) से प्रेम करती है, लेकिन उनके अलग-अलग धर्म इस रिश्ते के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं। दूसरी ओर उसका परिवार है, जो अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा और ‘यादव’ पहचान को बनाए रखने के लिए उसकी शादी अभिमन्यु यादव (अंकित भड़ाना) से कराना चाहता है।
    • फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे निजी संबंधों को राजनीतिक हित साधने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
    • कहानी समाज की उस रूढ़िवादी सोच पर प्रहार करती है जहाँ अंतरधार्मिक विवाह को एक बड़े अपराध या कलंक के रूप में देखा जाता है।
    • अंकित भड़ाना (अभिमन्यु) और प्रगति तिवारी के बीच के दृश्यों में उस मानसिक दबाव को बखूबी दर्शाया गया है जो एक लड़की अपने परिवार और अपनी खुशी के बीच महसूस करती है।

    निर्देशक और निर्माता

    • निर्देशक: फिल्म का निर्देशन अंकित बड़ाना ने किया है, जो पहले भी सामाजिक मुद्दों पर फिल्में बना चुके हैं।
    • नाम पर आपत्ति: कई संगठनों ने मांग की है कि फिल्म के शीर्षक से ‘यादव’ शब्द हटाया जाए।
    • राजनीतिक रंग: उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानीय नेताओं ने आरोप लगाया है कि चुनाव से पहले एक विशेष वोट बैंक को निशाना बनाने के लिए इस तरह का सिनेमा बनाया जा रहा है।
    • निर्माताओं का पक्ष: निर्देशक का कहना है कि उन्होंने किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि एक यथार्थवादी प्रेम कहानी दिखाने के लिए इस शीर्षक का चुनाव किया है।

    वर्तमान स्थिति

    फिल्म 27 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज को तैयार है। फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद से फिल्म को मुफ्त की पब्लिसिटी मिल रही है, जिसका फायदा इसे बॉक्स ऑफिस पर मिल सकता है।

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