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    पश्चिमी विक्षोभ से बदला मौसम का मिजाज, बारिश और बर्फबारी से लुढ़का पारा

    उत्तर-पश्चिम भारत में एक बार फिर मौसम ने करवट ली है। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, आज और कल भी बादलों के बरसने और ठंडी हवाएं चलने के आसार हैं।


    पहाड़ों पर बर्फ की चादर, मैदानों में बौछारें

    पिछले 24 घंटों के दौरान जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी हुई है। इसके चलते इन राज्यों के निचले इलाकों और पड़ोसी मैदानी राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर में झमाझम बारिश दर्ज की गई। इस बेमौसम बारिश और पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं ने मार्च के महीने में फिर से हल्की ठिठुरन पैदा कर दी है।


    दिल्ली-एनसीआर का हाल

    दिल्ली और आसपास के इलाकों (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम) में आज सुबह से ही बादल छाए हुए हैं। मौसम विभाग ने आज दिन भर हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना जताई है। बारिश के कारण दिल्ली का अधिकतम तापमान सामान्य से 3-4 डिग्री नीचे गिर सकता है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है, लेकिन अचानक आए इस बदलाव से स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है।


    आने वाले 48 घंटों का पूर्वानुमान

    मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 19 और 20 मार्च को उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में मौसम ऐसा ही बना रहेगा:

    • पंजाब और हरियाणा: ओलावृष्टि (Hailstorm) के साथ तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की गई है।
    • राजस्थान: राज्य के उत्तरी हिस्सों में हल्की बारिश और धूल भरी आंधी चलने की संभावना है।
    • उत्तर प्रदेश: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में बादलों की आवाजाही रहेगी और कुछ स्थानों पर मध्यम वर्षा हो सकती है।

    कृषि और जनजीवन पर प्रभाव

    इस बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में खड़ी गेहूं और सरसों की फसल के लिए ओलावृष्टि और तेज हवाएं नुकसानदेह साबित हो सकती हैं। वहीं, पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी के कारण कई संपर्क मार्ग बंद हो गए हैं, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है।

    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 21 मार्च से पश्चिमी विक्षोभ का असर कम होना शुरू होगा, जिसके बाद धीरे-धीरे तापमान में फिर से बढ़ोतरी देखी जाएगी।

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