भारत में मौसम के मिजाज में एक बड़ा विरोधाभास देखने को मिल रहा है। एक तरफ उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से बारिश और बर्फबारी का सिलसिला जारी है, वहीं दूसरी तरफ मैदानी इलाकों में सूरज के कड़े तेवर लोगों को सताने लगे हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, आने वाले दिनों में उत्तर और मध्य भारत के राज्यों में तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
पहाड़ों में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ
पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में पिछले 24 घंटों में हल्की से मध्यम बर्फबारी हुई है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए इन क्षेत्रों में ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। ऊंचे पहाड़ों पर हिमपात और निचले इलाकों में बारिश के कारण तापमान में गिरावट आई है, जिससे वहां अभी भी हल्की ठंड का अहसास बना हुआ है। हालांकि, यह राहत केवल पहाड़ी क्षेत्रों तक सीमित है।
मैदानी इलाकों में लू (Heatwave) की आहट
पहाड़ों की ठंडक के विपरीत, दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे मैदानी राज्यों में पारा तेजी से चढ़ रहा है। अप्रैल के दूसरे सप्ताह में ही कई शहरों का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है।
- उत्तर प्रदेश और बिहार: यहाँ पछुआ हवाओं के कारण शुष्क गर्मी बढ़ गई है। दोपहर के समय गर्म हवाएं चलने से लोगों का घर से निकलना दूभर हो गया है।
- राजस्थान और गुजरात: जैसलमेर और बाड़मेर जैसे जिलों में तापमान 42 डिग्री के करीब पहुंच चुका है, जहाँ लू की स्थिति बनने की संभावना है।
- मध्य प्रदेश: राज्य के पूर्वी हिस्सों में भी गर्मी का असर तेज हो रहा है, जहाँ अगले कुछ दिनों में आसमान साफ रहने और धूप तेज होने का अनुमान है।
दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत का हाल
दक्षिण भारत के राज्यों, विशेषकर केरल और तमिलनाडु में हल्की बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे वहां उमस भरी गर्मी से थोड़ी राहत मिल सकती है। वहीं, पूर्वोत्तर भारत के राज्यों जैसे असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में मानूसन पूर्व की बारिश (Pre-monsoon rain) जारी रहने का अनुमान है।
स्वास्थ्य सलाह
डॉक्टरों ने बढ़ती गर्मी को देखते हुए लोगों को अधिक मात्रा में तरल पदार्थ लेने और दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच सीधी धूप से बचने की सलाह दी है। किसानों के लिए भी यह समय चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि कटाई के सीजन में अचानक बढ़ते तापमान से फसलों की नमी प्रभावित हो सकती है। आने वाला पूरा हफ्ता मैदानी इलाकों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है।


