तमिलनाडु की राजनीति में इस समय जबरदस्त हलचल है। अभिनेता से नेता बने विजय (Thalapathy Vijay) की पार्टी तमिलगा वैत्री कझगम (TVK) ने विधानसभा चुनाव 2026 में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी जगह बनाई है, लेकिन सरकार बनाने को लेकर पेंच अभी भी फंसा हुआ है।
1. विजय का सरकार बनाने का दावा
6 मई 2026 को टीवीके (TVK) प्रमुख विजय चेन्नई स्थित लोक भवन पहुंचे और राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात की। विजय ने औपचारिक रूप से सरकार बनाने का दावा पेश किया है। उन्होंने राज्यपाल को बताया कि उनके पास जरूरी विधायकों का समर्थन है।
2. विधानसभा का गणित: बहुमत से थोड़ी दूरी
तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता है। चुनाव नतीजों के अनुसार स्थिति कुछ इस प्रकार है:
- TVK (विजय): 108 सीटें (सबसे बड़ी पार्टी)
- DMK: 59 सीटें
- AIADMK: 47 सीटें
- कांग्रेस: 5 सीटें
- अन्य (CPI, CPM, VCK, PMK): छोटी संख्या में सीटें
विजय की पार्टी बहुमत के जादूई आंकड़े (118) से 10 सीटें पीछे है। हालांकि, कांग्रेस ने अपने 5 विधायकों के साथ विजय को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है, जिससे आंकड़ा 113 तक पहुंच गया है।
3. राज्यपाल की असंतुष्टि का कारण
खबरों के अनुसार, राज्यपाल फिलहाल विजय के दावे से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं:
- संख्या बल की कमी: कांग्रेस के समर्थन के बावजूद विजय अभी भी 118 के आंकड़े से 5 सीटें दूर हैं।
- गठबंधन की अस्पष्टता: राज्यपाल का मानना है कि जब तक अन्य दल (जैसे CPI, CPM या VCK) लिखित में समर्थन पत्र नहीं देते, तब तक सरकार बनाने का न्यौता देना जल्दबाजी होगी।
- संवैधानिक राय: राज्यपाल इस मामले में कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रहे हैं ताकि भविष्य में किसी भी ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ या अस्थिरता से बचा जा सके।
4. DMK-कांग्रेस गठबंधन में दरार
इस सियासी ड्रामे का सबसे बड़ा मोड़ कांग्रेस का रुख रहा। सालों से DMK की सहयोगी रही कांग्रेस ने एम.के. स्टालिन का साथ छोड़कर विजय को समर्थन देने का फैसला किया है। डीएमके नेता टी.आर. बालू ने इसे जनता के साथ “विश्वासघात” करार दिया है।
आगे क्या?
फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति बनी हुई है। विजय की टीम अब VCK और वामपंथी दलों को साधने में जुटी है ताकि 118 का आंकड़ा पार किया जा सके। यदि अगले 24-48 घंटों में अन्य दलों का समर्थन पत्र राजभवन पहुंचता है, तो विजय तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले सकते हैं।
निष्कर्ष: तमिलनाडु में दशकों से चले आ रहे DMK और AIADMK के वर्चस्व को विजय ने तोड़ तो दिया है, लेकिन सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने के लिए उन्हें अभी कुछ और सहयोगियों के ‘अंगूठे के निशान’ की जरूरत है।


