वेनेजुएला की विपक्षी नेता और 2025 की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो ने एक ऐतिहासिक और विवादास्पद कदम उठाते हुए अपना नोबेल पदक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भेंट कर दिया है। गुरुवार (15 जनवरी) को व्हाइट हाउस में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान मचाडो ने यह सम्मान ट्रंप को सौंपा।
बैठक की मुख्य बातें
- ऐतिहासिक संदर्भ: मचाडो ने इस भेंट की तुलना 200 साल पुरानी एक घटना से की। उन्होंने बताया कि जिस तरह 1825 में जनरल लाफायेट ने साइमन बोलिवर को जॉर्ज वाशिंगटन की तस्वीर वाला पदक दिया था, उसी तरह आज बोलिवर की जनता “वाशिंगटन के उत्तराधिकारी” (ट्रंप) को यह सम्मान दे रही है।
- ट्रंप की प्रतिक्रिया: राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इसे “परस्पर सम्मान का अद्भुत संकेत” बताया। उन्होंने मचाडो की वीरता की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह उनके लिए गर्व की बात है।
- सम्मान का कारण: मचाडो ने कहा कि यह पदक वेनेजुएला में लोकतंत्र की बहाली और निकोलस मादुरो की सत्ता को हटाने के लिए ट्रंप की “अद्वितीय प्रतिबद्धता” की मान्यता में दिया गया है।
नोबेल कमेटी की आपत्ति
मचाडो के इस फैसले ने एक नई बहस छेड़ दी है। नॉर्वेजियन नोबेल संस्थान ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि “नोबेल शांति पुरस्कार हस्तांतरित (Transfer), साझा या रद्द नहीं किया जा सकता। एक बार पुरस्कार की घोषणा होने के बाद निर्णय अंतिम होता है।” नोबेल समिति के अनुसार, भौतिक पदक भले ही स्थान बदल ले, लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड में विजेता का खिताब मारिया कोरिना मचाडो के नाम ही रहेगा।
राजनीतिक मायने
विशेषज्ञों का मानना है कि मचाडो का यह कदम ट्रंप प्रशासन के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने और वेनेजुएला के राजनीतिक भविष्य में अपनी भूमिका सुरक्षित करने की एक कोशिश है। ट्रंप ने पहले भी कई बार सार्वजनिक रूप से नोबेल पुरस्कार पाने की इच्छा व्यक्त की थी।


