राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने अपने कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के केवल पहले दो छंद (stanzas) गाने के 1937 के अपने ऐतिहासिक फैसले पर कायम रहने का निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर के बयान और भाजपा के पलटवार से दोनों पक्षों में वाकयुद्ध तेज हो गया है।
1937 का प्रस्ताव और कांग्रेस का रुख
- स्वतंत्रता सेनानियों के निर्णय का हवाला:कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल और मौलाना आजाद द्वारा तय किए गए रास्ते पर ही चलेगी।
- 1937 का CWC प्रस्ताव: वर्ष 1937 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर कांग्रेस कार्यसमिति ने ‘वंदे मातरम’ के पहले दो अंतरों को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया था। कांग्रेस का तर्क है कि वह सरकार के नए प्रोटोकॉल के बजाय स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं के इस फैसले का पालन करेगी।
मणिशंकर अय्यर का विवादित बयान
- कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा कि केंद्र सरकार ने “मुसलमानों के प्रति नफरत” की वजह से ‘वंदे मातरम’ का पूरा पाठ अनिवार्य किया है।उन्होंने CWC के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि 1937 में टैगोर की सलाह पर ही दो पद गाने का नियम बना था और पार्टी उसी मार्ग पर चल रही है।
भाजपा का तीखा पलटवार
- ‘नई मुस्लिम लीग’ का आरोप: भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के इस कदम को “बेहद निंदनीय” करार दिया और आरोप लगाया कि 1931 और 1937 में मुस्लिम लीग ने ‘वंदे मातरम’ का विरोध किया था और कांग्रेस अब “नई मुस्लिम लीग” बन गई है।
- गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे कांग्रेस का “देश विरोधी फैसला” बताते हुए कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति के तहत राष्ट्रगीत को दो टुकड़ों में बांटा गया, जो स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है।


