उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। 19 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बाद प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्रियों, केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक से अलग-अलग मुलाकात की।
लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर (सरस्वती कुंज) में हुई इन मुलाकातों के मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
1. मुलाकातों का क्रम और समय
- सीएम योगी: बुधवार रात (18 फरवरी) करीब 8 बजे मुख्यमंत्री ने संघ प्रमुख से मुलाकात की, जो लगभग 30-40 मिनट चली।
- डिप्टी सीएम: गुरुवार सुबह (19 फरवरी) केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक संघ प्रमुख से मिलने पहुंचे। दोनों ने अलग-अलग करीब 10-15 मिनट तक भागवत से व्यक्तिगत संवाद किया।
2. क्यों बढ़ा सियासी पारा? (मुख्य एजेंडा)
हालांकि इन मुलाकातों को औपचारिक ‘शिष्टाचार भेंट’ बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं।
- 2027 की रणनीति: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी के लिए संघ और सरकार के बीच समन्वय (Coordination) पर चर्चा।
- मंत्रिमंडल विस्तार: अटकलें हैं कि प्रदेश में जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में कुछ बड़े फेरबदल हो सकते हैं।
- सोशल इंजीनियरिंग: संघ प्रमुख ने अपने प्रवास के दौरान ‘सामाजिक समरसता’ और ‘हिंदू एकता’ पर जोर दिया है, जिसे चुनाव से पहले जातिगत समीकरणों को साधने की कवायद माना जा रहा है।
- शताब्दी वर्ष: आरएसएस अपने शताब्दी वर्ष (2025-26) के कार्यक्रमों के माध्यम से जमीन पर अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहता है।
3. समन्वय पर जोर
सूत्रों के अनुसार, भागवत ने सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया है। विशेष रूप से हाल के दिनों में ‘भीतरघात’ या आंतरिक मतभेदों की खबरों के बीच, संघ प्रमुख का दोनों डिप्टी सीएम से व्यक्तिगत रूप से मिलना डैमेज कंट्रोल और अनुशासन का संदेश माना जा रहा है।


