उत्तरी अटलांटिक महासागर में अमेरिकी नौसेना और कोस्ट गार्ड ने एक हाई-वोल्टेज ऑपरेशन में रूसी झंडा लगे तेल टैंकर ‘मैरिनेरा’ (Marinera) को जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई 7 जनवरी 2026 को हुई, जो पिछले दो हफ्तों से चल रहे लुका-छिपी के खेल का नाटकीय अंत था।
पहचान बदलकर भागने की कोशिश
यह जहाज मूल रूप से ‘बेला-1’ (Bella-1) के नाम से जाना जाता था। अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर वेनेजुएला और ईरान से तेल परिवहन करने के कारण यह अमेरिका की रडार पर था।
- धोखाधड़ी: जब दिसंबर 2025 के अंत में अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने इसे रोकने की कोशिश की, तो चालक दल ने बीच समंदर में ही जहाज का नाम बदलकर ‘मैरिनेरा’ कर दिया और उस पर रूसी झंडा पेंट कर दिया।
- पंजीकरण: पकड़े जाने से बचने के लिए जहाज ने रातों-रात अपना रजिस्ट्रेशन रूस में करा लिया, ताकि उसे रूसी संप्रभुता का संरक्षण मिल सके।
रूसी नौसेना के साथ आमना-सामना
यह जब्ती केवल एक कानूनी कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक सैन्य गतिरोध में बदल गई थी।
- रूसी हस्तक्षेप: रूस ने अपने टैंकर को सुरक्षा देने के लिए एक परमाणु पनडुब्बी और युद्धपोत तैनात कर दिए थे।
- अमेरिकी ऑपरेशन: अमेरिकी कमांड ने ब्रिटेन की मदद से निगरानी विमान और हेलीकॉप्टरों के जरिए जहाज को घेरा। अंततः आइसलैंड के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिकी विशेष बलों ने जहाज पर चढ़कर उसे अपने नियंत्रण में ले लिया।
वैश्विक तनाव और प्रभाव
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, यह जहाज ‘शैडो फ्लीट’ (Shadow Fleet) का हिस्सा था, जो हिजबुल्लाह और अन्य प्रतिबंधित संगठनों के लिए फंड जुटाने का काम कर रहा था।
मॉस्को ने इस कार्रवाई को ‘समुद्री डकैती’ (Piracy) करार दिया है और कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का खुला उल्लंघन है।
यह घटना तब हुई है जब कुछ दिन पहले ही अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को पकड़ने का दावा किया था, जिससे क्षेत्र में तनाव पहले से ही चरम पर है।


