ईरान में जारी व्यापक सरकार विरोधी प्रदर्शनों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य हस्तक्षेप की चेतावनी के बीच तेहरान ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। रविवार, 11 जनवरी 2026 को ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कलिबाफ ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने ‘आजादी दिलाने’ के नाम पर कोई भी सैन्य कार्रवाई की, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने और इजरायल के वैध लक्ष्य (Legitimate Targets) होंगे।
ईरान-अमेरिका तनाव: मुख्य घटनाक्रम
1. ट्रंप की ‘लोडेड’ चेतावनी और ईरान का जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में वेनेजुएला में सफल सैन्य ऑपरेशन का हवाला देते हुए ईरान को आगाह किया था। उन्होंने कहा था कि यदि ईरान ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को मारना जारी रखा, तो अमेरिका “मदद के लिए तैयार और लोडेड (Locked and Loaded)” है।
इसके जवाब में ईरान के विधायी और सैन्य नेतृत्व ने स्पष्ट किया:
- निशाने पर इजरायल: ईरान ने पहली बार इजरायल को सीधे तौर पर इस टकराव में घसीटा है। कलिबाफ ने कहा कि किसी भी अमेरिकी उकसावे की कीमत इजरायल को चुकानी होगी।
- अमेरिकी ठिकाने: मध्य पूर्व (Middle East) में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को “अल्लाह के दुश्मनों के ठिकाने” करार देते हुए उन पर हमले की धमकी दी गई है।
2. ‘मौत की सजा’ और कट्टरपंथी रुख
ईरान के भीतर हालात और भी हिंसक होते जा रहे हैं। 11 जनवरी तक मिली रिपोर्टों के अनुसार:
- मृतकों की संख्या: मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक कम से कम 116 प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं।
- सजा-ए-मौत: ईरान के अटॉर्नी जनरल ने प्रदर्शनकारियों को ‘मोहारेब’ (ईश्वर का शत्रु) घोषित किया है, जिसकी सजा मौत है। संसद में सांसदों ने “अमेरिका मुर्दाबाद” के नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
3. इजरायल हाई अलर्ट पर
ईरान की इस सीधी धमकी के बाद इजरायल ने अपनी सीमाओं और रणनीतिक ठिकानों पर सुरक्षा बढ़ा दी है। इजरायली मीडिया के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और ट्रंप के बीच ईरान में जारी ‘अस्थिरता’ का फायदा उठाने और सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई है।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को डर है कि ट्रंप की आक्रामक ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और ईरान का हठ किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध को जन्म दे सकता है।


