अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष में एक नया मोड़ आया है। ट्रम्प प्रशासन ने यह आधिकारिक दावा किया है कि ईरान के साथ चल रही जंग 60 दिनों की अनिवार्य समय सीमा (डेडलाइन) समाप्त होने से पहले ही प्रभावी रूप से समाप्त हो चुकी है। व्हाइट हाउस के इस बयान ने अब अमेरिकी कांग्रेस और प्रशासन के बीच एक नई कानूनी और राजनीतिक रार पैदा कर दी है।
60 दिन की डेडलाइन का विवाद
अमेरिकी कानून ‘वॉर पावर्स एक्ट’ के तहत, राष्ट्रपति को बिना कांग्रेस की मंजूरी के सैन्य कार्रवाई शुरू करने के बाद 60 दिनों के भीतर उसे समाप्त करना होता है या आगे जारी रखने के लिए संसद (कांग्रेस) से औपचारिक अनुमति लेनी पड़ती है।
- प्रशासन का तर्क है कि मुख्य सैन्य अभियान पूरे हो चुके हैं और युद्धविराम जैसी स्थिति बन गई है, इसलिए अब उन्हें कांग्रेस की विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
- दूसरी ओर, डेमोक्रेट्स और कई विपक्षी सांसदों का कहना है कि जमीनी हकीकत अलग है और प्रशासन केवल जवाबदेही से बचने के लिए ‘युद्ध समाप्ति’ का ढोंग कर रहा है।
कांग्रेस में बढ़ता विरोध
अमेरिकी कांग्रेस में इस मुद्दे पर भारी हंगामा हो रहा है। सांसदों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने बिना किसी ठोस लंबी अवधि की रणनीति के सैन्य कदम उठाए। विपक्षी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने युद्ध की स्थिति पर स्पष्टता नहीं दी, तो वे रक्षा बजट में कटौती या राष्ट्रपति के विशेषाधिकारों को सीमित करने वाले प्रस्ताव ला सकते हैं।
ईरान और वैश्विक स्थिति
ट्रंप प्रशासन भले ही इसे 60 दिनों के भीतर खत्म बता रहा हो, लेकिन पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में तनाव अभी भी चरम पर है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक अस्थायी ठहराव हो सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें वाशिंगटन पर टिकी हैं कि क्या कांग्रेस और राष्ट्रपति के बीच यह टकराव किसी नए संवैधानिक संकट को जन्म देगा या युद्धविराम की यह स्थिति स्थायी बनी रहेगी।


