अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बेहद खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच हुई शांति वार्ता के विफल होने के बाद, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरानी बंदरगाहों की पूर्ण समुद्री नाकाबंदी (Naval Blockade) शुरू कर दी है। इस घोषणा के साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मच गया है और कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल
अमेरिका की इस सख्त कार्रवाई की खबर फैलते ही वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं।
- ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): इसमें लगभग 7.98% की वृद्धि हुई, जिससे इसकी कीमत $102.80 प्रति बैरल के पार पहुँच गई।
- WTI क्रूड: अमेरिकी क्रूड की कीमतों में भी 8% से अधिक की तेजी देखी गई, जो अब $104.24 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नाकाबंदी लंबे समय तक खिंचती है, तो तेल की कीमतें $120 से $150 तक भी जा सकती हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका होगा।
नाकाबंदी का स्वरूप और प्रभाव
CENTCOM के अनुसार, यह नाकाबंदी ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर “निष्पक्ष” रूप से लागू होगी।
- होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह गैर-ईरानी बंदरगाहों (जैसे सऊदी अरब, यूएई) की ओर जाने वाले जहाजों के लिए रास्ता खुला रखेगा। हालांकि, ईरान ने इस नाकाबंदी को “बेतुका” और “हास्यास्पद” करार दिया है।
- वैश्विक आपूर्ति: दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा इसी क्षेत्र से गुजरता है। इस नाकाबंदी से न केवल ईरान बल्कि इराक, कुवैत और कतर जैसे देशों से होने वाली आपूर्ति पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।
भारत और दुनिया पर असर
भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। आपूर्ति में रुकावट या कीमतों में वृद्धि से भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे मुद्रास्फीति (Inflation) पर दबाव बढ़ेगा।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए दुनिया भर के शेयर बाजारों और सप्लाई चेन में भारी अस्थिरता की आशंका बनी हुई है। यदि ईरान जवाबी कार्रवाई के रूप में होर्मुज की खाड़ी को पूरी तरह बंद करने की कोशिश करता है, तो यह वैश्विक संकट का रूप ले सकता है।


