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    अमेरिका और इजरायल का ईरान पर भीषण हमला, खामेनेई के दफ्तर और 30 ठिकाने बने निशाना

    मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुँच गया है क्योंकि अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर एक भीषण सैन्य हमला शुरू कर दिया है। 28 फरवरी 2026 की सुबह हुए इस हमले में राजधानी तेहरान समेत ईरान के लगभग 30 महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया है।

    खामेनेई के दफ्तर और सरकारी भवनों पर स्ट्राइक

    रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हमला बेहद सटीक और आक्रामक था। हमलावरों ने विशेष रूप से ईरानी नेतृत्व के केंद्रों को निशाना बनाया:

    • सुप्रीम लीडर का दफ्तर: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय के पास भीषण धमाके सुने गए। सुरक्षा कारणों से खामेनेई को तुरंत एक गुप्त और सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया है।
    • मंत्रालयों पर हमला: ईरानी राष्ट्रपति भवन और खुफिया एजेंसी के मुख्यालयों समेत कई सरकारी मंत्रियों के दफ्तरों पर रॉकेट दागे गए हैं।
    • सैन्य और परमाणु ठिकाने: तेहरान के उत्तरी इलाके ‘सैयद खदान’ और यूनिवर्सिटी स्ट्रीट के पास भी मिसाइलें गिरी हैं।

    अमेरिका और इजरायल का साझा ऑपरेशन

    अमेरिकी रक्षा अधिकारियों और इजरायली रक्षा मंत्री योव गैलेंट (या इजरायल काट्ज़) ने पुष्टि की है कि यह एक ‘निवारक हमला’ (Preemptive Strike) है।

    • उद्देश्य: इजरायल का कहना है कि यह हमला ईरान की ओर से आसन्न खतरों को समाप्त करने के लिए किया गया है।
    • अमेरिकी भागीदारी: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही ईरान को चेतावनी दी थी। इस ऑपरेशन में अमेरिकी वायुसेना के F-22 रैप्टर लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों के एक बड़े बेड़े ने हिस्सा लिया। ट्रंप ने इसे ‘परमाणु महत्वाकांक्षाओं’ पर लगाम लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।

    ईरान की स्थिति और प्रतिक्रिया

    ईरान ने फिलहाल अपना एयरस्पेस (हवाई क्षेत्र) पूरी तरह से बंद कर दिया है। तेहरान के आसमान में काले धुएं का गुबार देखा जा रहा है। ईरानी मीडिया ‘तसनीम’ के अनुसार, हमले के बाद देश में हाई अलर्ट जारी है और ईरान ने किसी भी सैन्य कार्रवाई का ‘कड़ा जवाब’ देने की कसम खाई है।

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