अप्रैल 2026 की शुरुआत भारतीय किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती लेकर आई है। उत्तर भारत के पहाड़ों से लेकर दक्षिण भारत के तटीय इलाकों तक मौसम के बदलते मिजाज ने कृषि क्षेत्र में भारी चिंता पैदा कर दी है। बेमौसम बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि ने विशेष रूप से उस समय दस्तक दी है, जब अधिकांश फसलें पककर कटाई के लिए तैयार थीं।
मौसम में बदलाव के मुख्य कारण
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस उलटफेर का मुख्य कारण एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) है, जो पाकिस्तान के मध्य भाग और पंजाब के ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) के साथ मिलकर काम कर रहा है। इसके प्रभाव से न केवल उत्तर भारत, बल्कि मध्य और प्रायद्वीपीय भारत में भी आर्द्र हवाएं आ रही हैं।
किसानों पर संकट और फसल का नुकसान
इस बेमौसम मौसमी गतिविधि ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र के किसानों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है।
- गेहूं और सरसों: कटाई के ठीक पहले हुई बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की खड़ी फसल बिछ गई है। इससे दानों की गुणवत्ता खराब होने और उनके काले पड़ने का खतरा बढ़ गया है। राजस्थान के बीकानेर और नागौर क्षेत्रों में ईसबगोल और जीरे की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
- बागवानी और सब्जियां: उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड और कानपुर क्षेत्र में ओलों ने सब्जियों (भिंडी, लौकी, टमाटर) को बर्बाद कर दिया है। महाराष्ट्र में अंगूर, आम और केले के बागानों पर इसका व्यापक असर पड़ा है।
- आर्थिक क्षति: कई क्षेत्रों में किसानों को 30% से 50% तक नुकसान होने की आशंका है।
उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकार ने किसानों को सलाह दी है कि वे फसल नुकसान की रिपोर्ट 72 घंटों के भीतर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) ऐप या टोल-फ्री नंबर 14447 पर दर्ज कराएं ताकि समय पर मुआवजा मिल सके।
जान-माल की हानि और अलर्ट
खराब मौसम केवल फसलों तक सीमित नहीं रहा। उत्तर प्रदेश के कानपुर और कासगंज में आकाशीय बिजली गिरने और पेड़ गिरने की घटनाओं में अब तक पांच लोगों की मौत की खबर है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आने वाले कुछ दिनों के लिए दिल्ली-NCR, बिहार और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।


