होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चेतावनियों के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी हलचल देखी जा रही है। 6 अप्रैल 2026 को ब्रेंट क्रूड की कीमतें उछलकर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं।
ट्रंप की ‘डेडलाइन’ और सख्त तेवर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक कड़ा अल्टीमेटम देते हुए मंगलवार रात (अमेरिकी समयानुसार) तक होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की चेतावनी दी है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में कहा कि यदि ईरान ने ऐसा नहीं किया, तो उसके बिजली संयंत्रों (Power Plants) और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाएगा। ट्रंप ने इस संभावित कार्रवाई को “पावर प्लांट डे और ब्रिज डे” का नाम दिया है।
बाजार पर असर
- ब्रेंट क्रूड: अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.16% बढ़कर 110.30 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
- WTI क्रूड: अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 1.86% की बढ़त के साथ 113.62 डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
- आपूर्ति संकट: दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल की आपूर्ति इसी मार्ग (Strait of Hormuz) से होती है। ईरान द्वारा इसे ब्लॉक किए जाने से वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी और महंगाई का खतरा बढ़ गया है।
भारत पर प्रभाव
कच्चे तेल की कीमतों में इस भारी उछाल का सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है। हालांकि, दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल के दाम $110 के ऊपर टिके रहते हैं, तो तेल विपणन कंपनियां (OMCs) जल्द ही कीमतों में संशोधन कर सकती हैं। निजी खुदरा विक्रेताओं और प्रीमियम ईंधन के दामों में पहले ही बढ़ोतरी के संकेत मिलने लगे हैं।
भू-राजनीतिक परिदृश्य
ईरान का कहना है कि वह युद्ध के नुकसान की पूरी भरपाई होने तक इस मार्ग को नहीं खोलेगा। दूसरी ओर, ओपेक (OPEC) देशों ने मई 2026 से उत्पादन में मामूली वृद्धि (करीब 2 लाख बैरल प्रतिदिन) का फैसला किया है, लेकिन यह बाजार की अनिश्चितता को कम करने के लिए पर्याप्त नहीं लग रहा है।
अगले 24 से 48 घंटे वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं, क्योंकि ट्रंप की ‘डेडलाइन’ नजदीक आ रही है।


