अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर टैरिफ लगाने और व्यापारिक रिश्तों में तनाव के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत लचीलापन दिखाया है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर बढ़कर 8.2 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में दर्ज की गई 5.6 प्रतिशत की वृद्धि दर से काफी अधिक है, जिसने वैश्विक व्यापार चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद को रेखांकित किया है।
प्रमुख आर्थिक संकेतकों में उछाल
- विनिर्माण क्षेत्र का प्रदर्शन: इस तिमाही में वृद्धि का मुख्य इंजन विनिर्माण क्षेत्र रहा, जिसने 7.4 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की। यह पिछले साल की 1.2 प्रतिशत की धीमी वृद्धि की तुलना में एक बड़ी छलांग है, जो देश में औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आने का संकेत देती है।
- कृषि क्षेत्र की वृद्धि: सामान्य मानसून और बेहतर फसल के कारण कृषि क्षेत्र ने भी 4.0 प्रतिशत की अच्छी वृद्धि दर्ज की, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान कर रही है।
- निर्माण और सेवाएँ: निर्माण क्षेत्र ने 7.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की, जबकि व्यापार, होटल, परिवहन और संचार जैसी सेवाओं ने भी 8.2 प्रतिशत की दर से वृद्धि की, जो उपभोक्ता मांग और निवेश में सुधार को दर्शाता है।
ट्रंप के टैरिफ का सीमित असर
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ का भारत के समग्र निर्यात और जीडीपी पर सीमित और प्रबंधनीय असर पड़ा है। मजबूत घरेलू मांग और सरकारी खर्च (Government Expenditure) में वृद्धि ने बाहरी झटकों को अवशोषित करने में मदद की है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में स्थिर कीमतों (Constant Prices) पर निजी अंतिम उपभोग व्यय (Private Final Consumption Expenditure) में 8.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो दर्शाता है कि नागरिकों ने खपत और खरीदारी पर अधिक खर्च किया है।


