पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक 15-सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव भेजकर कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है। एक ओर जहां शांति की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति भी बढ़ा रहा है, जिससे स्थिति बेहद जटिल हो गई है। ट्रंप प्रशासन ने तेहरान को स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि वह युद्ध से बचना चाहता है, तो उसे इन शर्तों पर विचार करना होगा। इस प्रस्ताव की मुख्य बातें निम्नलिखित मानी जा रही हैं:
- परमाणु कार्यक्रम पर पूर्ण रोक: ईरान को अपने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करना होगा और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों (IAEA) को बिना शर्त पहुंच देनी होगी।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इस मार्ग को खुला रखना होगा और किसी भी कमर्शियल जहाज को परेशान न करने की गारंटी देनी होगी।
- छद्म युद्ध (Proxy War) पर लगाम: ईरान को हिजबुल्लाह और हूतियों जैसे समूहों को दी जाने वाली सैन्य और वित्तीय सहायता बंद करनी होगी।
- बदले में राहत: यदि ईरान इन शर्तों को मानता है, तो अमेरिका उस पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाने और उसे वैश्विक बैंकिंग प्रणाली (SWIFT) में वापस शामिल करने पर विचार कर सकता है।
एक तरफ कूटनीति, दूसरी तरफ सैन्य तैयारी
शांति प्रस्ताव के बावजूद, अमेरिका ने अपनी रणनीति को ‘दोहरी धार’ रखा है। पेंटागन की हालिया गतिविधियों से पता चलता है कि अमेरिका ने भूमध्य सागर और लाल सागर में अपने विमान वाहक पोतों (Aircraft Carriers) के साथ अतिरिक्त सैनिकों और फाइटर जेट्स की तैनाती शुरू कर दी है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को इन शर्तों पर विचार करने के लिए पाँच दिनों की मोहलत दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि वार्ता विफल रहती है, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा और सैन्य बुनियादी ढांचे पर हमले करने से पीछे नहीं हटेगा।
वैश्विक प्रभाव और भारत की चिंता
इस तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। भारत के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश का अधिकांश तेल आयात इसी मार्ग से होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे पर ट्रंप से बात कर शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया है।
ईरान की ओर से अभी तक इस 15-सूत्रीय प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पूरी दुनिया की नजरें अब तेहरान के अगले कदम पर टिकी हैं।


