वेनेजुएला में ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ के तहत राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगले निशाने पर ग्रीनलैंड और ईरान होने की खबरें तेज हैं। ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य कमांडरों को इन क्षेत्रों के लिए विशेष रणनीतिक योजनाएं (Contingency Plans) तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
1. ग्रीनलैंड पर सैन्य विकल्प की चर्चा
ट्रंप लंबे समय से ग्रीनलैंड को खरीदने या नियंत्रित करने की इच्छा जताते रहे हैं। वेनेजुएला ऑपरेशन की सफलता के बाद व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि ग्रीनलैंड को अमेरिकी प्रभाव में लाना राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता है।
- सैन्य तैयारी: ‘डेली मेल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने विशेष बलों को ग्रीनलैंड पर ‘संभावित आक्रमण’ की योजना बनाने को कहा है।
- तर्क: अमेरिका का मानना है कि यदि वह ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं करता, तो चीन या रूस वहां अपना प्रभाव बढ़ा लेंगे।
- जवाब: डेनमार्क और यूरोपीय देशों ने कड़ा विरोध किया है। डेनमार्क के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि किसी भी सैन्य घुसपैठ का जवाब गोलीबारी से दिया जाएगा।
2. ईरान पर मंडराता खतरा
ईरान में चल रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार नहीं रुका, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा।
- हमले के विकल्प: ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के अनुसार, पेंटागन ने ट्रंप को ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने वाले कई विकल्पों की ब्रीफिंग दी है।
- ईरान की प्रतिक्रिया: तेहरान ने इसे ‘युद्ध भड़काने वाली’ कार्रवाई बताया है और किसी भी हमले का भीषण जवाब देने की कसम खाई है।
3. वेनेजुएला: कब्जे की शुरुआत?
वेनेजुएला में मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका वहां तब तक मौजूद रहेगा जब तक एक ‘सुरक्षित ट्रांजिशन’ नहीं हो जाता। उन्होंने यह भी कहा कि वेनेजुएला का तेल अब अमेरिकी हितों के लिए उपलब्ध होगा।
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की यह ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति अंतरराष्ट्रीय कानूनों और नाटो (NATO) जैसे गठबंधनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।


