अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब अपने चरम पर पहुँच गया है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को तबाह करने की हालिया धमकियों के बाद, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कड़ा रुख अपनाया है।
IRGC का दावा: अमेरिकी और इस्राइली ठिकानों पर प्रहार
ईरानी सेना के ‘खातम अल-अंबिया’ सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता ने हाल ही में बयान जारी कर ट्रंप की धमकियों को “अहंकारी और निराधार” करार दिया है।
- जवाबी कार्रवाई: IRGC का दावा है कि उनके “इस्लाम के योद्धाओं” ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और “जायोनी” (इस्राइली) ठिकानों पर विनाशकारी हमले जारी रखे हैं।
- निशाने पर सैन्य ठिकाने: रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने जॉर्डन, कुवैत, सऊदी अरब और बहरीन जैसे देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया है। हाल ही में तेल अवीव में भी ईरानी मिसाइलों के गिरने से नुकसान की खबरें आई हैं।
ट्रंप का ‘अल्टीमेटम’ और 10 अप्रैल की समयसीमा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक सख्त अल्टीमेटम दिया है, जिसका केंद्र स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) है।
- पावर प्लांट और ब्रिज डे: ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने मंगलवार (7 अप्रैल) तक होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह नहीं खोला और अमेरिका की शर्तों पर समझौता नहीं किया, तो अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों (Power Plants) और पुलों पर भीषण बमबारी करेगा। उन्होंने इसे “पावर प्लांट डे” का नाम दिया है।
- बुनियादी ढांचे पर खतरा: ट्रंप की इस धमकी का उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन को पूरी तरह ठप करना है।
युद्ध की वर्तमान स्थिति (अप्रैल 2026)
फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुआ यह संघर्ष अब एक पूर्ण युद्ध का रूप ले चुका है:
- ईरान का नेतृत्व: फरवरी में हुए शुरुआती हमलों में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और कई शीर्ष अधिकारियों की मौत के दावों के बावजूद, IRGC अभी भी संगठित होकर जवाबी हमले कर रही है।
- परमाणु केंद्रों पर हमला: बुशहर परमाणु संयंत्र के पास हालिया हवाई हमलों में सुरक्षा गार्डों की मौत हुई है, जिससे रेडिएशन के खतरे और तनाव में और वृद्धि हुई है।
- वैश्विक प्रभाव: इस युद्ध के कारण होर्मुज से तेल की आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे दुनिया भर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं और वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी जा रही है।
क्या शांति की कोई उम्मीद है?
हालाँकि ट्रंप ने 45 दिनों के युद्धविराम (Ceasefire) के प्रस्ताव को एक “महत्वपूर्ण कदम” बताया था, लेकिन ईरान ने इसे खारिज कर दिया है। ईरान की मांग है कि युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त किया जाए और अमेरिका लगाए गए सभी प्रतिबंधों को हटाए। फिलहाल, दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं और 10 अप्रैल तक स्थिति और भी विस्फोटक होने की आशंका है।


