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    ट्रंप ने खामेनेई को दी सीधी चेतावनी, वहीं मारेंगे जहां सबसे ज्यादा दर्द होगा

    ईरान में जारी भीषण सरकार विरोधी प्रदर्शनों और बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के खिलाफ अपने तेवर और कड़े कर लिए हैं। 10 जनवरी 2026 को व्हाइट हाउस में तेल और गैस कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने ईरान को खुली धमकी देते हुए कहा कि अगर वहां प्रदर्शनकारियों का दमन या हत्या की गई, तो अमेरिका ऐसी जवाबी कार्रवाई करेगा जो ईरान के लिए “बेहद दर्दनाक” होगी।

    “ईरान बड़ी मुसीबत में है”

    ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “ईरान इस वक्त बहुत बड़ी मुसीबत में है। मुझे ऐसा लग रहा है कि वहां के लोग उन शहरों पर कब्जा कर रहे हैं, जिनकी कल्पना भी कुछ हफ्तों पहले मुमकिन नहीं थी। हम स्थिति पर बहुत बारीकी से नजर रखे हुए हैं।” उन्होंने ईरानी नेताओं को आगाह किया कि वे प्रदर्शनकारियों पर गोली न चलाएं, क्योंकि “अगर तुम गोली चलाओगे तो हम भी (गोली) चलाएंगे।”

    हमले की रणनीति और ‘नो बूट्स ऑन ग्राउंड’

    अपनी चेतावनी को और स्पष्ट करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनका मतलब जमीन पर अमेरिकी सेना (Boots on ground) उतारना नहीं है। बल्कि, अमेरिका रणनीतिक रूप से उन ठिकानों और हितों पर हमला करेगा जहां ईरान को सबसे ज्यादा “दर्द” महसूस होगा। उन्होंने कहा कि ईरान ने अपने लोगों के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया है और अब वह उसका खामियाजा भुगत रहा है।

    ईरान का पलटवार: खामेनेई का जवाब

    अमेरिकी धमकी के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने भी सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने ट्रंप को “तानाशाह” करार देते हुए कहा कि अमेरिका का आकलन हमेशा की तरह गलत है। खामेनेई ने आरोप लगाया कि ये प्रदर्शन विदेशी ताकतों के इशारे पर हो रहे हैं और ईरानी शासन किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने कोई हिमाकत की तो ईरान ‘प्री-एम्प्टिव अटैक’ (Pre-emptive attack) यानी पहले हमला करने से भी पीछे नहीं हटेगा।

    बिगड़ते हालात:

    • प्रदर्शन का विस्तार: ईरान के 31 प्रांतों के 100 से अधिक शहरों में विरोध प्रदर्शन फैल चुके हैं।
    • इंटरनेट ब्लैकआउट: स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ईरान सरकार ने देशभर में इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय कॉल्स पर पाबंदी लगा दी है।
    • मौतों का आंकड़ा: रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले दो हफ्तों में हुई हिंसा में अब तक कम से कम 62 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों गिरफ्तारियां हुई हैं।
    • विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह रुख ईरान के भीतर चल रहे आंदोलन को और हवा दे सकता है, जिससे मध्य-पूर्व में एक बड़े सैन्य टकराव का खतरा बढ़ गया है।
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