अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में घोषित 15% ग्लोबल टैरिफ भारत के लिए एक मिली-जुली लेकिन बड़े परिप्रेक्ष्य में “राहत” देने वाली खबर मानी जा रही है। यह गणित पिछले कुछ महीनों से चल रहे भारी टैरिफ युद्ध और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले से उपजा है।
50% से 15% तक का सफर: गणित समझिए
पिछले साल के अंत तक, भारत पर अमेरिकी आयात शुल्क (Tariffs) बहुत अधिक थे। अब इसमें भारी कमी आई है:
- अतीत (अक्टूबर 2025): भारत पर कुल 50% तक टैरिफ लग रहा था (25% रेसिप्रोकल टैरिफ + 25% रूस से तेल खरीदने के कारण पेनल्टी)।
- फरवरी की शुरुआत (ट्रेड डील): पीएम मोदी और ट्रंप की बातचीत के बाद, इसे घटाकर 18% करने पर सहमति बनी थी।
- अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के पुराने ग्लोबल टैरिफ को अवैध बताया। इसके जवाब में ट्रंप ने सेक्शन 122 का उपयोग करते हुए 15% का अस्थायी ‘इंपोर्ट सरचार्ज’ लगा दिया।
फायदा: जो भारतीय निर्यातक 18% या 25% शुल्क देने की तैयारी में थे, उन्हें अब केवल 15% अतिरिक्त शुल्क देना होगा। यह अंतरिम राहत 150 दिनों के लिए है।
किन उत्पादों पर लगेगा और किन पर नहीं?
ट्रंप प्रशासन ने कुछ उत्पादों को इस नए सरचार्ज से बाहर रखा है, जबकि कुछ पर अभी भी भारी शुल्क बरकरार है।
| श्रेणी | स्थिति | प्रमुख उत्पाद |
| राहत वाले सेक्टर (15% शुल्क) | फायदा | टेक्सटाइल (कपड़े), जेम्स एंड ज्वेलरी, IT सेवाएं और इंजीनियरिंग सामान। |
| छूट प्राप्त (Zero/Low Surcharge) | पूर्ण राहत | जरूरी खनिज (Minerals), ऊर्जा उत्पाद, और कुछ कृषि उत्पाद (जैसे टमाटर, संतरा)। |
| भारी शुल्क वाले (50% तक) | झटका | स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर पर 50% शुल्क जारी रहेगा। |
| ऑटो सेक्टर | मध्यम प्रभाव | कुछ ऑटो कंपोनेंट्स पर 25% शुल्क लगाया गया है। |
भारत के लिए यह ‘लाभ’ क्यों है?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए यह फायदे का सौदा इसलिए है क्योंकि:
- चीन और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले भारत पर टैरिफ की दर कम या समान स्तर पर आ गई है, जिससे अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान सस्ते होंगे।
- रूस से कच्चा तेल खरीदने पर लगा 25% का दंडात्मक शुल्क पूरी तरह हट गया है।
- अगले महीने (मार्च 2026) भारत और अमेरिका के बीच एक स्थायी द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, जिससे ये दरें और भी कम हो सकती हैं।
आगे क्या?
24 फरवरी 2026 से ये नई दरें प्रभावी हो जाएंगी। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय की एक टीम वर्तमान में वॉशिंगटन में है ताकि इस समझौते के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप दिया जा सके।


