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    ट्रंप की क्यूबा पर टेढ़ी नजर, ​क्या वेनेजुएला जैसा होगा हाल?

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर क्यूबा के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार करते हुए दावा किया है कि वहां की कम्युनिस्ट सरकार ‘गिरने के कगार पर’ है। ट्रंप का यह बयान जनवरी 2026 में वेनेजुएला में हुए बड़े राजनीतिक उलटफेर और वहां से तेल की सप्लाई रुकने के बाद आया है।

    ट्रंप की चेतावनी और ‘डील’ का सुझाव

    ​ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि अब क्यूबा को वेनेजुएला से मिलने वाला तेल और पैसा पूरी तरह बंद हो जाएगा। उन्होंने कहा, “क्यूबा सरकार गिरने के लिए तैयार दिखती है। उन्हें जल्द से जल्द एक समझौता (Deal) कर लेना चाहिए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।”

    ​ट्रंप प्रशासन का मानना है कि वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और वहां के तेल संसाधनों पर अमेरिकी नियंत्रण के बाद क्यूबा की कमर टूट चुकी है।

    ​क्यूबा के संकट की मुख्य वजहें

    ​क्यूबा दशकों से अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए वेनेजुएला पर निर्भर रहा है। वर्तमान में स्थिति बिगड़ने के कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

    • वेनेजुएला से सप्लाई ठप: वेनेजुएला क्यूबा को रोजाना लगभग 26,500 बैरल तेल भेजता था, जो अब पूरी तरह रुक गया है।
    • आर्थिक बदहाली: क्यूबा पहले से ही बिजली की भारी किल्लत, खाने-पीने की वस्तुओं की कमी और मुद्रास्फीति से जूझ रहा है।
    • मेक्सिको का हाथ पीछे खींचना: हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मेक्सिको की सरकारी कंपनी ‘पेमेक्स’ (Pemex) ने भी दबाव के चलते क्यूबा को भेजे जाने वाले तेल के शिपमेंट को फिलहाल टाल दिया है।

    ​क्यूबा सरकार की प्रतिक्रिया

    ​ट्रंप की इस खुली धमकी पर क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज कैनेल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्यूबा एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है और वह किसी के दबाव में नहीं झुकेगा। उन्होंने ट्रंप के बयान को ‘आतंकवाद’ करार देते हुए कहा कि क्यूबा अपने देश की रक्षा के लिए अंत तक लड़ेगा।

    ​विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन अब क्यूबा के भीतर ही ऐसे ‘इनसाइडर्स’ की तलाश कर रहा है जो सत्ता परिवर्तन में मदद कर सकें। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जो लंबे समय से क्यूबा के प्रति सख्त रहे हैं, इस रणनीति के मुख्य रणनीतिकार माने जा रहे हैं।

    ​यदि क्यूबा को जल्द ही वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत नहीं मिले, तो वहां का आर्थिक संकट सामाजिक विद्रोह का रूप ले सकता है, जिसकी उम्मीद ट्रंप प्रशासन कर रहा है।

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