अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) को “जीनियस” करार दिया है। ट्रंप का मानना है कि इस सख्त कार्रवाई ने ईरान को घुटनों पर ला दिया है और अब बिना परमाणु रियायतों के कोई समझौता संभव नहीं है।
नाकेबंदी को बताया ‘जीनियस’ और ‘फुलप्रूफ’
वाशिंगटन डीसी में पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी 100% सफल रही है। उन्होंने अमेरिकी नौसेना की ताकत की सराहना करते हुए कहा कि यह रणनीति “जीनियस” है क्योंकि इसने ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से ठप कर दिया है। ट्रंप के अनुसार, ईरान की नौसेना अब “समुद्र के तल” पर है और उनकी वायु सेना फिर कभी उड़ान नहीं भर पाएगी।
‘परमाणु हथियार नहीं तो कोई डील नहीं’
ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान के साथ किसी भी नए समझौते की पहली और अनिवार्य शर्त परमाणु हथियारों का पूर्ण त्याग है। उन्होंने कहा, “इस समय, तब तक कोई समझौता नहीं होगा जब तक वे इस बात पर सहमत नहीं हो जाते कि उनके पास कोई परमाणु हथियार नहीं होगा।”
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान अब बातचीत के लिए बेताब है और वर्तमान में दोनों पक्षों के बीच टेलीफोन के माध्यम से चर्चा चल रही है।
42 जहाजों को वापस खदेड़ा गया
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 42वें वाणिज्यिक जहाज को सफलतापूर्वक रोक दिया या उसका मार्ग बदल दिया, जो नाकेबंदी का उल्लंघन करने की कोशिश कर रहा था। यह नाकेबंदी मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और ईरानी बंदरगाहों पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य ईरान के तेल व्यापार और समुद्री वाणिज्य को पूरी तरह से रोकना है।
ईरान का रुख और क्षेत्रीय प्रभाव
ईरान ने इस नाकेबंदी को “युद्ध की कार्रवाई” और “समुद्री डकैती” करार दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक सशर्त युद्धविराम का प्रस्ताव दिया है, जिसमें मांग की गई है कि यदि अमेरिका नाकेबंदी हटाता है और शत्रुता समाप्त करता है, तो ईरान सैन्य अभियान रोक देगा।
आर्थिक प्रभाव:
- दैनिक नुकसान: अमेरिकी अनुमानों के अनुसार, इस नाकेबंदी से ईरान को प्रतिदिन लगभग 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है।
- तेल संकट: वैश्विक तेल बाजारों में इस तनाव के कारण अस्थिरता बनी हुई है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्गों में से एक है।
राष्ट्रपति ट्रंप का यह “डबल अटैक” (आर्थिक नाकेबंदी और परमाणु रियायतों की सख्त मांग) ईरान को एक ऐसी स्थिति में ले आया है जहाँ उसके पास विकल्प सीमित हैं। जहाँ ट्रंप इसे एक बड़ी जीत बता रहे हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात को लेकर चिंतित है कि यदि जल्द ही कोई राजनयिक समाधान नहीं निकला, तो क्षेत्र में एक बड़ा संघर्ष छिड़ सकता है।


