सुप्रीम कोर्ट ने आवासीय सोसायटियों में आवारा कुत्तों (Stray Dogs) को खिलाने और उनके बढ़ते आतंक से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता वंदना जैन की एक दलील पर एक बेहद अहम और तीखी टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थानों पर पशु प्रेम के नाम पर अन्य नागरिकों की सुरक्षा और अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए।
सुनवाई के दौरान जब एक वकील ने सोसायटियों के भीतर आवारा कुत्तों को खिलाने के अधिकार की दलील दी, तो पीठ ने कहा, “आज आप सोसाइटी में आवारा कुत्तों को खिलाने की अनुमति मांग रहे हैं, कल अगर कोई सोसाइटी के अंदर भैस (Buffalo) लेकर आ गया और उसे वहीं बांधने की जिद करने लगा, तो फिर आप क्या करेंगे? नियम सबके लिए समान होने चाहिए।”
अदालत के मुख्य बिंदु
- नागरिकों की सुरक्षा: कोर्ट ने कहा कि किसी को भी जानवरों के प्रति क्रूरता नहीं करनी चाहिए, लेकिन बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
- साझा स्थान: सोसायटियों के कॉमन एरिया पर सभी का अधिकार है। वहां आवारा जानवरों को प्रोत्साहित करना विवाद का कारण बनता है।
- स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी: कोर्ट ने नगर निगमों को आवारा कुत्तों के टीकाकरण और नसबंदी अभियान को तेज करने के निर्देश दिए हैं।
- यह टिप्पणी उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो नियमों की अनदेखी कर आवासीय परिसरों में आवारा पशुओं के जमावड़े का समर्थन करते हैं।


