अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। मंगलवार, 3 मार्च 2026 को व्हाइट हाउस में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के साथ मुलाकात के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान बहुत जल्द अमेरिका पर हमला करने की योजना बना रहा था, जिसे रोकने के लिए उन्होंने ‘प्री-एम्प्टिव’ (निवारक) स्ट्राइक का रास्ता चुना।
ट्रंप के दावे: मुख्य बिंदु
ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य कार्रवाई को उचित ठहराते हुए कई बड़ी बातें कहीं:
- ईरान का “पहला हमला” वाला दावा: ट्रंप ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो के उस बयान को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि इजरायल ने पहले हमला किया और अमेरिका बाद में शामिल हुआ। ट्रंप ने दावा किया, “मुझे लगता है कि वे (ईरान) पहले हमला करने वाले थे। अगर कुछ हुआ है, तो मैंने इजरायल को हमला करने के लिए मजबूर किया ताकि खतरा टल सके।”
- स्पेन को व्यापारिक धमकी: ट्रंप ने नाटो सहयोगी स्पेन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। स्पेन ने ईरान पर हमलों के लिए अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों (Bases) का इस्तेमाल करने देने से मना कर दिया था। इस पर ट्रंप ने नाराजगी जताते हुए कहा, “हम स्पेन के साथ सभी व्यापारिक संबंध खत्म कर देंगे। हमें स्पेन से कुछ नहीं चाहिए।”
- सैन्य सफलता का दावा: ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी और इजरायली हमलों में ईरान की वायु सेना, नौसेना और एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह तबाह हो गए हैं। उन्होंने दावा किया कि शुरुआती हमलों में ही 49 वरिष्ठ ईरानी नेताओं को खत्म कर दिया गया है।
ईरान में सत्ता परिवर्तन हो
ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वे ईरान में सत्ता परिवर्तन (Regime Change) चाहते हैं और जब तक उनके सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते, हमले जारी रहेंगे। उन्होंने ईरान के सैन्य अधिकारियों को सरेंडर करने पर ‘छूट’ देने का प्रस्ताव भी दिया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पेन और ब्रिटेन जैसे सहयोगियों के साथ अमेरिका के मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं, जिससे वैश्विक कूटनीति में तनाव बढ़ गया है।


