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    राम मंदिर में चढ़ावा चोरी: भंग होगा राम मंदिर ट्रस्ट, वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की तरह होगी व्यवस्था

    अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं (financial irregularities) का मामला सामने आने के बाद ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के प्रशासनिक ढांचे में बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। हालिया घटनाक्रमों और राजनीतिक दबाव के बीच इस बात की चर्चा जोरों पर है कि वर्तमान ट्रस्ट को भंग कर इसका पुनर्गठन किया जा सकता है। इसके साथ ही, मंदिर के दैनिक प्रबंधन को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड या तिरुपति तिरुमाला देवस्थानम की तर्ज पर एक पेशेवर और जवाबदेह व्यवस्था लागू की जा सकती है।

    ट्रस्ट के प्रशासनिक संकट की मुख्य वजहें

    मुख्य घटनाक्रमप्रशासनिक प्रभाव
    महासचिव व ट्रस्टी का इस्तीफाचंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफे से ट्रस्ट में शक्ति संतुलन प्रभावित।
    SIT जांच और FIRविशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद 8 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी और गिरफ्तारियां।
    तीन महत्वपूर्ण पद रिक्तपहले से खाली एक पद समेत अब ट्रस्ट के तीन सबसे प्रभावी पद पूरी तरह से रिक्त।

    बड़े पदाधिकारियों के इस्तीफे से बढ़ा संकट

    फरवरी 2020 में केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित इस ट्रस्ट में सबसे अहम भूमिका महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र निभा रहे थे। मंदिर के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास और कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि की भूमिका हमेशा से सीमित रही है। ऐसे में चंपत राय और अनिल मिश्र के हटने से ट्रस्ट के सामने अचानक संचालन और निर्णयों को लेकर एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है।

    चोरी के इस मामले में एसआईटी (SIT) ने अपनी जांच में पाया कि दानपात्रों की गिनती के समय सीसीटीवी कैमरे बंद थे और रिकॉर्ड-कीपिंग में भारी लापरवाही बरती गई। विपक्ष और विभिन्न पुजारी संगठनों द्वारा इस ‘आस्था के गबन’ पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की जा रही है और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच या सीबीआई (CBI) जांच की मांग उठ रही है।

    वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की तर्ज पर नया मॉडल

    राम मंदिर में प्रतिदिन आने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे, कीमती सोने-चांदी के आभूषणों के रखरखाव और लाखों श्रद्धालुओं के प्रबंधन को देखते हुए अब वर्तमान व्यवस्था को अपर्याप्त माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार अब मंदिर के संचालन को पूरी तरह पेशेवर हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है:

    • सीईओ (CEO) की तैनाती: नए मॉडल के तहत आईएएस (IAS) स्तर के एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की जा सकती है, जो सीधे सरकार और बोर्ड के प्रति जवाबदेह होगा।
    • कड़े वित्तीय नियम: माता वैष्णो देवी और तिरुपति बोर्ड की तरह यहां भी दान के पैसे और बहुमूल्य धातुओं के ऑडिट, कोडिंग और डिजिटलीकरण के लिए कड़े मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू किए जाएंगे।

    भावी बदलाव: राज्य सरकार और पीएमओ (PMO) स्तर पर इस बात को लेकर गंभीर मंथन चल रहा है कि ट्रस्ट का पुनर्गठन करके इसमें साधु-संतों, प्रमुख दानदाताओं और कारसेवकों के परिवारों को शामिल किया जाए, ताकि जनता और भक्तों के बीच इस सर्वोच्च धार्मिक केंद्र की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को फिर से बहाल किया जा सके।

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