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    अयोध्या में दुनिया का इकलौता ‘राम यंत्र’, तमिलनाडु में बना, जानें क्या हैं खासियतें?

    आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर के गर्भगृह में एक अत्यंत दुर्लभ और अद्वितीय ‘श्री राम यंत्र’ की स्थापना की। चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन आयोजित इस अनुष्ठान ने न केवल आध्यात्मिक बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी उत्तर और दक्षिण भारत के मिलन का एक नया अध्याय लिखा है।


    क्या है ‘श्री राम यंत्र’ और इसकी खासियत?

    यह यंत्र कोई साधारण धातु की संरचना नहीं है, बल्कि इसे शास्त्रोक्त विधि से तैयार किया गया एक दिव्य प्रतीक माना जा रहा है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

    • तमिलनाडु में निर्माण: इस विशेष यंत्र को तमिलनाडु के कुशल शिल्पकारों और वेद पाठी विद्वानों की देखरेख में तैयार किया गया है। इसे बनाने में प्राचीन ‘चोल कालीन’ धातु विज्ञान और आगम शास्त्रों की परंपराओं का पालन किया गया है।
    • अष्टधातु का प्रयोग: यंत्र का निर्माण सोने, चांदी, तांबा और पीतल सहित अष्टधातुओं के मिश्रण से किया गया है। माना जाता है कि अष्टधातु ब्रह्मांडीय ऊर्जा को संचित करने में सबसे प्रभावी होती है।
    • अद्वितीय ज्यामिति: यंत्र पर भगवान राम के मंत्रों और विशिष्ट ज्यामितीय आकृतियों (त्रिकोण, वृत्त और कमल की पंखुड़ियां) को सूक्ष्मता से उकेरा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह दुनिया का इकलौता ऐसा यंत्र है जो सीधे तौर पर श्री राम की ‘विजय ऊर्जा’ और ‘मर्यादा’ का प्रतिनिधित्व करता है।
    • आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र: इसे मंदिर के गर्भगृह में रामलला की मूर्ति के समीप स्थापित किया गया है। मान्यता है कि यह यंत्र मंदिर परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगा और भक्तों की आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने में सहायक होगा।

    राष्ट्रपति का दौरा और ऐतिहासिक महत्व

    1. प्रथम नागरिक द्वारा स्थापना: देश की राष्ट्रपति द्वारा इस यंत्र की स्थापना करना राष्ट्र की एकता और सांस्कृतिक अखंडता का प्रतीक है।
    2. चैत्र नवरात्रि का शुभ योग: आज से हिंदू नववर्ष (संवत 2083) और नवरात्रि की शुरुआत हुई है, जिसे किसी भी नए और पवित्र कार्य के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
    3. 7000 मेहमान: इस भव्य आयोजन के साक्षी बनने के लिए देश के विभिन्न कोनों से संत, विद्वान और विशिष्ट अतिथि अयोध्या पहुंचे।

    दक्षिण और उत्तर का संगम

    राम मंदिर में तमिलनाडु निर्मित इस यंत्र की स्थापना ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना को साकार करती है। यह दर्शाता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे पूरे राष्ट्र की चेतना में रचे-बसे हैं।

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