भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति की पहचान बन चुका यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI अब 10 साल का हो गया है। 25 अगस्त 2016 को आम लोगों के लिए शुरू हुई यह व्यवस्था आज देश में छोटे-बड़े भुगतान का सबसे आसान माध्यम बन चुकी है। किराने की दुकान से लेकर ऑटो रिक्शा, चाय की गुमटी, अस्पताल और बड़े कारोबारी लेनदेन तक, एक QR कोड स्कैन कर मोबाइल से भुगतान करना आम बात हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने UPI के एक दशक पूरे होने पर इसे भारत के डिजिटल भुगतान सफर का बड़ा मोड़ बताया और लोगों से अपने अनुभव साझा करने की अपील की।
UPI को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने भारतीय रिजर्व बैंक की निगरानी में विकसित किया। शुरुआत में यह सीमित बैंकों के साथ शुरू हुआ था, लेकिन आज इसका दायरा करोड़ों उपभोक्ताओं और व्यापारियों तक पहुंच चुका है। UPI ने बैंक खाते से सीधे और तुरंत पैसे भेजने की प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया। इसके लिए बैंक खाता नंबर, IFSC कोड या नकदी की जरूरत नहीं पड़ती; UPI ID, मोबाइल नंबर या QR कोड के जरिए भुगतान संभव है।
10 साल में 13 हजार गुना बढ़ा लेनदेन
आंकड़े UPI की जबरदस्त सफलता की कहानी बताते हैं। वित्त वर्ष 2016-17 में UPI के जरिए सिर्फ 1.78 करोड़ लेनदेन हुए थे। वित्त वर्ष 2025-26 तक यह संख्या बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक पहुंच गई। यानी एक दशक में लेनदेन की संख्या करीब 13,000 गुना बढ़ी। इसी दौरान लेनदेन का कुल मूल्य लगभग 0.07 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 314 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो 4,000 गुना से अधिक की वृद्धि है।
UPI ने खासकर छोटे कारोबारियों और आम लोगों के भुगतान करने का तरीका बदल दिया है। पहले दुकानदारों को छुट्टे पैसे की समस्या रहती थी और ग्राहकों को नकदी साथ रखनी पड़ती थी। अब मोबाइल निकालिए, QR स्कैन कीजिए और कुछ सेकंड में भुगतान पूरा। यही वजह है कि डिजिटल पेमेंट अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गांवों और छोटे कस्बों तक भी तेजी से पहुंच चुका है।
QR कोड बना रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा
आज QR कोड भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का आम दृश्य बन चुका है। सड़क किनारे रेहड़ी-पटरी लगाने वाले से लेकर बड़े शोरूम तक, हर जगह QR आधारित भुगतान दिखाई देता है। इससे छोटे व्यापारियों को भी डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़ने का अवसर मिला है। ग्राहकों के लिए भी मोबाइल को एक तरह से “चलता-फिरता बैंक” बना दिया गया है।
UPI की सफलता अब भारत की सीमाओं से बाहर भी पहुंच रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 11 देशों में UPI को स्वीकार किया जा रहा है। इससे भारतीय यात्रियों के लिए विदेशों में डिजिटल भुगतान की सुविधा बढ़ी है और भारत के रियल-टाइम पेमेंट मॉडल को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।
प्रधानमंत्री मोदी ने UPI के 10 साल पूरे होने पर कहा कि इसकी व्यापकता और पहुंच हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। उन्होंने लोगों से यह भी पूछा कि UPI ने उनकी जिंदगी को किस तरह आसान बनाया है।
कुल मिलाकर, पिछले 10 वर्षों में UPI ने भारत को नकदी आधारित भुगतान से रियल-टाइम डिजिटल भुगतान की ओर तेजी से आगे बढ़ाया है। QR कोड और मोबाइल आधारित ट्रांजैक्शन ने खरीदारी, व्यापार और रोजमर्रा के लेनदेन की तस्वीर बदल दी है।


