मार्च का महीना विदा होते-होते उत्तर भारत के मौसम में एक बड़ा उलटफेर लेकर आया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण उत्तर-पश्चिम भारत के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। 31 मार्च 2026 को जारी बुलेटिन के मुताबिक, आने वाला पूरा सप्ताह अनिश्चितता भरा रहने वाला है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ‘पश्चिमी विक्षोभ’ का पैटर्न बदल रहा है, जिसके कारण मार्च-अप्रैल जैसे महीनों में भी पहाड़ों पर भारी बर्फबारी और मैदानों में असामान्य बारिश देखी जा रही है।
पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानों में झमाझम बारिश
पिछले 24 घंटों के दौरान हिमालयी क्षेत्रों, विशेषकर जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी दर्ज की गई है। इसके चलते कई प्रमुख राजमार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ है।
पंजाब और हरियाणा: कई जिलों में तेज हवाओं के साथ मध्यम से भारी बारिश हुई है। कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि (Hailstorm) की भी खबरें हैं, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
दिल्ली-NCR: राजधानी में मंगलवार सुबह से ही बादल छाए रहे और हल्की बूंदाबांदी ने पारे को नीचे गिरा दिया। ठंडी हवाओं के चलने से लोगों को एक बार फिर हल्की सिहरन का अहसास होने लगा है।
उत्तर प्रदेश और राजस्थान: पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तरी राजस्थान के हिस्सों में धूल भरी आंधी के बाद बारिश ने गर्मी से राहत दी है।
तापमान में भारी गिरावट
मार्च के अंत में जहां आमतौर पर गर्मी अपनी दस्तक दे देती है, वहीं इस बेमौसम बारिश ने तापमान को सामान्य से 4°C से 7°C नीचे धकेल दिया है। मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान 25°C से 28°C के बीच सिमट गया है।न्यूनतम तापमान में भी 3-4 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे रातें ठंडी हो गई हैं।
IMD का ‘येलो अलर्ट’ और पूरे सप्ताह का पूर्वानुमान
मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह मौसमी बदलाव केवल एक-दो दिन के लिए नहीं है। IMD के अनुसार:
- अगले 4-5 दिन: उत्तर-पश्चिम भारत में रुक-रुक कर बारिश और गरज के साथ छींटे पड़ने का सिलसिला जारी रहेगा।
- तेज हवाएं: 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है।
- किसानों के लिए चेतावनी: कटाई के लिए तैयार गेहूं और सरसों की फसलों के लिए यह बारिश चिंता का विषय बनी हुई है। ओलावृष्टि से फसलों के बिछने (Lodging) का खतरा बढ़ गया है।
पर्यटकों के लिए सलाह
बर्फबारी के कारण हिल स्टेशनों (मनाली, शिमला, गुलमर्ग) में पर्यटकों की आमद बढ़ सकती है, लेकिन प्रशासन ने भूस्खलन (Landslides) के खतरे को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी है। पर्यटकों को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने से पहले मौसम की ताजा जानकारी लेने और स्थानीय गाइडों के संपर्क में रहने को कहा गया है।
कुल मिलाकर, उत्तर भारत के निवासियों को इस पूरे सप्ताह छाता और हल्के गर्म कपड़े साथ रखने की जरूरत होगी, क्योंकि सूरज और बादलों की लुका-छिपी के बीच पारा अभी और लुढ़क सकता है।


