ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अब इस पूरे ऑपरेशन के पीछे की “इनसाइड स्टोरी” और खुफिया साजिशों की परतें खुलने लगी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय सूत्रों के अनुसार, इस हमले की सफलता के पीछे सऊदी अरब की भूमिका और शाही परिवार के भीतर चल रहे ‘डबल गेम’ को एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
सऊदी अरब का ‘डबल गेम’
कहा जा रहा है कि दुनिया के सामने सऊदी अरब (रियाद) लगातार ईरान की संप्रभुता का सम्मान करने और कूटनीतिक समाधान की बात कर रहा था, लेकिन पर्दे के पीछे कहानी कुछ और ही थी।
- प्रिंस खालिद बिन सलमान (KBS) की भूमिका: सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के छोटे भाई और रक्षा मंत्री, प्रिंस खालिद ने हाल ही में अमेरिका का दौरा किया था। खुफिया सूत्रों के अनुसार, वहां उन्होंने ट्रंप प्रशासन को स्पष्ट संकेत दिया कि अब ईरान पर सैन्य कार्रवाई को टालना उसे और निडर बना देगा।
- दोहरा रुख: एक तरफ सऊदी अरब ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उसकी हवाई सीमा (Airspace) का उपयोग ईरान पर हमले के लिए नहीं होने दिया जाएगा, वहीं दूसरी ओर इजरायल और अमेरिका को ईरान के ‘अंदरूनी ठिकानों’ की सटीक खुफिया जानकारी साझा करने के आरोप लग रहे हैं।
कैसे मारे गए सुप्रीम लीडर खामेनेई?
यह हमला किसी सामान्य बमबारी जैसा नहीं था, बल्कि एक सटीक इंटेलिजेंस ऑपरेशन था।
- ऑपरेशन रोरिंग लॉयन (Operation Roaring Lion): इजरायल और अमेरिका ने मिलकर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। इसमें खामेनेई के तेहरान स्थित बेहद सुरक्षित परिसर (Leadership House) को निशाना बनाया गया।
- खुफिया जानकारी का लीक होना: बताया जा रहा है कि एक उच्च-स्तरीय बैठक की सटीक जानकारी हमलावरों के पास थी। यह जानकारी संभवतः ईरान के भीतर मौजूद किसी “अंदरूनी सूत्र” या क्षेत्रीय सहयोगी (सऊदी/इजरायली खुफिया नेटवर्क) के माध्यम से लीक हुई।
- हमले की तीव्रता: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की कि “भारी और सटीक बमबारी” (Pinpoint Bombing) के माध्यम से उस बंकर को नष्ट कर दिया गया जहाँ खामेनेई छिपे थे। मलबे से उनका शव बरामद होने की खबरें भी सामने आई हैं।
- परिवार और कमांडरों का अंत: इस हमले में खामेनेई के साथ उनकी बेटी, दामाद, पोते और ईरान के रक्षा मंत्री सहित 7 शीर्ष सैन्य अधिकारी भी मारे गए हैं।
ईरान में भविष्य की स्थिति
ईरान ने 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है, लेकिन सत्ता के गलियारों में अब उत्तराधिकार की जंग शुरू हो गई है। ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसे नेता को चुनने की है जो इस बिखरे हुए देश को संभाल सके।
इस घटना ने मध्य-पूर्व के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। जहाँ एक ओर इजरायल और अमेरिका इसे अपनी जीत मान रहे हैं, वहीं सऊदी अरब की संदिग्ध भूमिका ने उसे ईरान समर्थित गुटों (जैसे हुती विद्रोही) के सीधे निशाने पर ला खड़ा किया है।


