भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने टेलीविजन रेटिंग पॉइंट्स (TRP) को लेकर एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। मंत्रालय ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और वैश्विक संघर्षों (जैसे अमेरिका-ईरान तनाव) के दौरान टीवी समाचार चैनलों द्वारा की जा रही “अनावश्यक सनसनीखेज और अटकलबाजी वाली” रिपोर्टिंग पर अंकुश लगाने के लिए चार सप्ताह के लिए न्यूज़ चैनलों की टीआरपी रिपोर्टिंग रोकने का निर्देश दिया है।
टीआरपी पर रोक का कारण
सरकार के अनुसार, संकट या युद्ध जैसी स्थितियों के दौरान न्यूज़ चैनल रेटिंग की होड़ में ऐसी सामग्री प्रसारित करते हैं जिससे जनता में अनावश्यक दहशत फैलती है।
- सनसनीखेज खबरें: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान कई चैनलों को तथ्यों के बजाय अटकलों और ड्रामेबाजी का सहारा लेते पाया गया।
- जनता में दहशत: विशेष रूप से उन लोगों के परिवार और मित्र जो प्रभावित क्षेत्रों (जैसे पश्चिमी एशिया या सीमावर्ती इलाकों) में रह रहे हैं, ऐसी खबरों से अत्यधिक मानसिक तनाव और असुरक्षा महसूस करते हैं।
- प्रतिस्पर्धा पर लगाम: टीआरपी डेटा रुकने से चैनलों पर रेटिंग के लिए एक-दूसरे से आगे निकलने का दबाव कम होगा, जिससे वे अधिक जिम्मेदार पत्रकारिता कर सकेंगे।
सरकारी निर्देश और कार्यान्वयन
- वैधानिक आधार: मंत्रालय ने यह आदेश ‘टेलीविजन रेटिंग एजेंसियों के लिए नीति दिशानिर्देश’ के खंड 24.2 के तहत जारी किया है।
- प्रसार भारती और बार्क (BARC): सरकार ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) को तत्काल प्रभाव से डेटा जारी न करने का निर्देश दिया है।
- अवधि: यह रोक फिलहाल 4 सप्ताह (एक महीने) के लिए है, जिसे स्थिति की समीक्षा के बाद आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
उद्योग की प्रतिक्रिया
सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि इस निर्देश को सभी हितधारकों (Stakeholders) ने व्यापक रूप से स्वीकार कर लिया है। अब तक ब्रॉडकास्टर्स या रेटिंग एजेंसियों की ओर से इसके विरुद्ध कोई आधिकारिक आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई है।
सरकार का यह कदम “रेटिंग आधारित पत्रकारिता” के बजाय “तथ्य आधारित पत्रकारिता” को बढ़ावा देने की एक कोशिश है। विशेषकर राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय संकट के समय मीडिया की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है, जिसे सुनिश्चित करने के लिए यह एहतियाती कदम उठाया गया है।


