सुदीप्तो सेन की फिल्में हमेशा से ही समाज के उन पहलुओं को उजागर करती रही हैं, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। उनकी नई फिल्म ‘चरक’ भी इसी श्रेणी में आती है, जो अंधविश्वास और ‘आस्था के मेले’ की आड़ में पनप रही कुरीतियों पर करारी चोट करती है।
कहानी: अंधविश्वास और आतंक
फिल्म की कहानी एक ग्रामीण इलाके में लगने वाले ‘चरक मेले’ के इर्द-गिर्द बुनी गई है। यहाँ लोग अपनी मन्नतों को पूरा करने के लिए शरीर को पीड़ा पहुँचाने जैसी खौफनाक रस्में निभाते हैं। अंजलि पाटिल ने एक ऐसी महिला का किरदार निभाया है जो अपने परिवार को इस ‘अंधविश्वास के जाल’ से बाहर निकालने के लिए संघर्ष करती है। कहानी में एक रहस्य है जो धीरे-धीरे खुलता है और दर्शकों को झकझोर कर रख देता है।
अभिनय और निर्देशन
- अंजलि पाटिल: फिल्म की जान अंजलि पाटिल हैं। उनका अभिनय बेहद प्रभावशाली है। उनके चेहरे पर दिखने वाला डर और गुस्सा दर्शकों को सीधे जोड़ता है।
- साहिदुर रहमान और सुब्रत दत्ता: इन कलाकारों ने भी अपने किरदारों को पूरी ईमानदारी से निभाया है, जिससे फिल्म का माहौल यथार्थवादी लगता है।
- निर्देशन: सुदीप्तो सेन ने ग्रामीण भारत के उस डरावने सच को कैमरे में बखूबी कैद किया है, जहाँ लोग अंधविश्वास के नाम पर अपनी जान तक जोखिम में डाल देते हैं।
फिल्म की खूबी और कमी
- खूबी: फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका ‘स्क्रीनप्ले’ है। यह फिल्म कहीं भी आपको बोर नहीं होने देती। फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर माहौल को और अधिक डरावना बनाता है।
- कमी: फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी ‘गति’ (Pacing) है। दूसरे हाफ में कुछ दृश्य बहुत खींचे हुए लगते हैं, जो कहानी की तीव्रता को थोड़ा कम कर देते हैं। कुछ जगहों पर कहानी का अंत थोड़ा जल्दबाजी में किया हुआ लगता है, जिससे दर्शक थोड़े असंतुष्ट महसूस कर सकते हैं।


