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    कृषि इतिहास का सबसे बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’, सरकार का दावा, समृद्धि के नए द्वार खोलेगी ट्रेड डील

    भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर एक नई रिपोर्ट ने व्यापार जगत और कृषि क्षेत्र में खलबली मचा दी है। इस समझौते में अमेरिका द्वारा भारतीय कृषि उत्पादों पर ‘जीरो टैरिफ’ (शून्य शुल्क) की पेशकश की गई है, जो भारतीय किसानों के लिए समृद्धि के नए द्वार खोल सकता है। निष्कर्ष: यदि यह रिपोर्ट धरातल पर उतरती है, तो यह भारतीय कृषि इतिहास का सबसे बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हो सकती है। सरकार का तर्क है कि यह डील “विन-विन” (Win-Win) स्थिति है। जहाँ विपक्ष इस समझौते को ‘आत्मसमर्पण’ बता रहा है, वहीं यह नई रिपोर्ट कुछ चौंकाने वाले और सकारात्मक दावे कर रही है।


    जीरो टैरिफ रिपोर्ट के मुख्य दावे

    इस रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने भारत के चुनिंदा कृषि निर्यात पर आयात शुल्क को पूरी तरह खत्म करने का प्रस्ताव दिया है:

    • निर्यात में उछाल: यदि जीरो टैरिफ लागू होता है, तो भारत के चावल, फल (विशेषकर आम और अंगूर), सब्जियां और मसालों के लिए अमेरिकी बाजार पूरी तरह खुल जाएगा। इससे भारतीय कृषि निर्यात में सालाना 20-25% की वृद्धि का अनुमान है।
    • किसानों की आय: रिपोर्ट का दावा है कि बिचौलियों के बजाय सीधे निर्यात से जुड़े किसानों की आय में 1.5 से 2 गुना तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
    • प्रतिस्पर्धा में बढ़त: वर्तमान में वियतनाम और थाईलैंड जैसे देश कम शुल्क के कारण अमेरिकी बाजार में हावी हैं। जीरो टैरिफ मिलने से भारतीय उत्पाद वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे।

    विपक्ष के आरोपों और रिपोर्ट के बीच का विरोधाभास

    राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने इस डील को लेकर चिंता जताई थी कि इससे अमेरिकी डेयरी और पोल्ट्री उत्पाद भारतीय बाजार को नुकसान पहुंचाएंगे। हालांकि, नई रिपोर्ट के दावे इसके विपरीत हैं:

    1. सुरक्षा कवच: रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने अपने संवेदनशील उत्पादों (जैसे डेयरी) पर उच्च टैरिफ को बरकरार रखा है, जबकि अमेरिका ने भारतीय उत्पादों को रियायत दी है।
    2. डेटा शेयरिंग का सच: विपक्ष के ‘डेटा सरेंडर’ के आरोपों पर रिपोर्ट कहती है कि यह केवल कृषि तकनीक और फसल सुधार के डेटा तक सीमित है, जो भारतीय किसानों को बेहतर फसल प्रबंधन में मदद करेगा।

    चुनौतियां अभी भी बाकी हैं

    भले ही अमेरिका शून्य शुल्क की बात कर रहा है, लेकिन भारतीय किसानों के लिए दो बड़ी चुनौतियां रहेंगी:

    • फाइटोसेनेटरी मानक: अमेरिका के कड़े गुणवत्ता मानकों (Quality Standards) को पूरा करना भारतीय किसानों के लिए सबसे बड़ी बाधा होगी। पेस्टिसाइड (कीटनाशक) के इस्तेमाल को लेकर कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
    • लॉजिस्टिक्स: ताजे उत्पादों को अमेरिका तक सही स्थिति में पहुँचाने के लिए कोल्ड स्टोरेज और एयर कार्गो सुविधाओं में बड़े निवेश की आवश्यकता होगी।

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