प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। अपने संदेश में पीएम मोदी ने टैगोर को मात्र एक कवि या लेखक नहीं, बल्कि ‘भारत की सभ्यतागत चेतना का प्रतीक’ बताया।
भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षक
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि गुरुदेव के विचार आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरित करते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टैगोर ने भारतीय संस्कृति, दर्शन और मूल्यों को वैश्विक पटल पर जो सम्मान दिलाया, वह अतुलनीय है।
- सभ्यतागत चेतना: पीएम ने उल्लेख किया कि गुरुदेव का दृष्टिकोण केवल साहित्य तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने एक ऐसे भारत की कल्पना की थी जो आधुनिक होने के साथ-साथ अपनी जड़ों से भी गहराई से जुड़ा हो।
- शिक्षा और शांति: प्रधानमंत्री ने शांतिनिकेतन और विश्व-भारती विश्वविद्यालय की स्थापना का जिक्र करते हुए कहा कि टैगोर का शिक्षा मॉडल ‘प्रकृति और मानवता के मिलन’ का सबसे सुंदर उदाहरण है।
- पीएम मोदी ने अपने संदेश में टैगोर के राष्ट्रवाद की व्याख्या करते हुए कहा कि उनका राष्ट्रवाद संकीर्ण नहीं, बल्कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना से ओत-प्रोत था। उन्होंने लिखा कि टैगोर के गीतों ने स्वाधीनता संग्राम के दौरान भारतीयों के भीतर अदम्य साहस और आत्मविश्वास का संचार किया था।
पश्चिम बंगाल और गुरुदेव का रिश्ता
पश्चिम बंगाल में चल रहे राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रमों के बीच पीएम मोदी का यह संदेश अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने बंगाल की महान भूमि को नमन करते हुए कहा कि टैगोर के विचार ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को सिद्ध करने में हमारा मार्ग प्रशस्त करते रहेंगे।
प्रमुख बिंदु: रवींद्रनाथ टैगोर (1861-1941)
- नोबेल सम्मान: 1913 में ‘गीतांजलि’ के लिए साहित्य का नोबेल पाने वाले वे पहले एशियाई थे।
- दो राष्ट्रों का गान: वे दुनिया के इकलौते कवि हैं जिनकी रचनाएं दो देशों (भारत और बांग्लादेश) का राष्ट्रगान बनीं।
- बहुआयामी व्यक्तित्व: वे एक चित्रकार, संगीतकार और दार्शनिक भी थे जिन्होंने ‘रवींद्र संगीत’ के माध्यम से संगीत की एक नई विधा को जन्म दिया।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में गुरुदेव की प्रसिद्ध पंक्तियों का स्मरण करते हुए कहा कि भारत को उनके सपनों का ‘ज्ञान के प्रकाश से आलोकित’ राष्ट्र बनाने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। यह श्रद्धांजलि केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उस महान मनीषी के प्रति कृतज्ञता है जिन्होंने आधुनिक भारत के निर्माण की नींव रखी थी।


