टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले बहुप्रतीक्षित मुकाबले को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने इस मैच में खेलने के लिए आईसीसी (ICC) के सामने कड़ी शर्तें रख दी हैं। लाहौर में हुई बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि पाकिस्तान इस बार आसानी से झुकने के मूड में नहीं है।
पाकिस्तान की 3 प्रमुख शर्तें:
- राजस्व में अधिक हिस्सेदारी (Increase in Revenue Share): पाकिस्तान ने मांग की है कि आईसीसी के राजस्व मॉडल में उसका हिस्सा बढ़ाया जाए। पीसीबी का तर्क है कि भारत-पाकिस्तान मैचों से होने वाली भारी कमाई का एक बड़ा हिस्सा उन्हें मिलना चाहिए, ताकि वे अपने क्रिकेट ढांचे को मजबूत कर सकें।
- द्विपक्षीय सीरीज की गारंटी (Guarantee of Bilateral Series): पीसीबी चाहता है कि आईसीसी भारत को पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय सीरीज खेलने के लिए राजी करे। पाकिस्तान का कहना है कि वे केवल आईसीसी टूर्नामेंटों में भारत के साथ खेलकर आर्थिक नुकसान नहीं उठा सकते, उन्हें नियमित सीरीज की जरूरत है।
- हाइब्रिड मॉडल पर स्थायी रोक: पीसीबी ने शर्त रखी है कि भविष्य में किसी भी टूर्नामेंट के लिए ‘हाइब्रिड मॉडल’ (जैसे एशिया कप के दौरान हुआ था) का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान चाहता है कि यदि उसे किसी टूर्नामेंट की मेजबानी मिलती है, तो भारत को वहां जाकर खेलना ही होगा।
क्या है पाकिस्तान की रणनीति? विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की यह ‘गंदी चाल’ दरअसल आईसीसी पर दबाव बनाने की एक कोशिश है। पाकिस्तान जानता है कि भारत-पाक मैच के बिना आईसीसी को भारी वित्तीय नुकसान होगा। इसीलिए वह अपनी मांगों को मनवाने के लिए ‘बहिष्कार’ के हथियार का इस्तेमाल कर रहा है।
आईसीसी का रुख: आईसीसी ने फिलहाल इन मांगों पर कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया है। सूत्रों के मुताबिक, आईसीसी ने पाकिस्तान को याद दिलाया है कि मेगा इवेंट्स में भागीदारी के अनुबंध पर वे पहले ही हस्ताक्षर कर चुके हैं और मैच से हटने पर उन्हें करोड़ों का जुर्माना और निलंबन झेलना पड़ सकता है।
आने वाले कुछ दिनों में यह साफ हो जाएगा कि पाकिस्तान अपनी इन शर्तों पर अड़ा रहता है या आईसीसी के दबाव में ‘यू-टर्न’ लेता है। क्रिकेट प्रेमी 15 फरवरी को कोलंबो में होने वाले इस महामुकाबले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।


